श्रीमद्भागवत कथा संपन्न, स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती ने दिया दिव्य संदेश
◆भागवत श्रवण जन्म-जन्मांतर के पुण्यों का उदय है : स्वामी ज्ञानानंद
◆हवन, पूर्णाहुति और भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र के बजरंगनगर हलीमाबाद में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन शुक्रवार को आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति भाव से परिपूर्ण वातावरण में हुआ। पूर्णाहुति के इस पावन अवसर पर जिले के नगपुर गांव में जन्म लेकर अपने ज्ञान, तप और सेवा से देश-विदेश में प्रतिष्ठित हुए परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ज्ञानानंद सरस्वतीजी महाराज का आगमन हुआ, जिनके सानिध्य से आयोजन आलोकित हो उठा।
कथा मंच से अपने आशीर्वचन देते हुए स्वामी ज्ञानानंद सरस्वतीजी ने कहा कि भागवत कथा का श्रवण अत्यंत दुर्लभ है। इसे सुनने के लिए देवता भी इच्छुक रहते हैं। यह सौभाग्य तभी प्राप्त होता है जब जन्म-जन्मांतर के शुभ कर्म उदित होते हैं और पूर्वजों की अहैतुक कृपा हम पर बरसती है।
उन्होंने बताया कि मार्गशीर्ष माह में कथा की पूर्णाहुति होना अत्यंत शुभ फलदायी है, क्योंकि यह काल भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय समय माना गया है। उन्होंने हलीमाबाद की पुण्य भूमि, तमसा नदी के पावन तट और द्विवेदी परिवार के स्नेहिल आतिथ्य को इस दिव्य आयोजन का आधार बताया। स्वामीजी ने कहा कि आप सभी ने सप्ताह भर जिस श्रद्धा, उल्लास और भक्ति से कथा का रसपान किया है, वही आपके पुण्य संस्कारों का प्रतीक है। इसका प्रतिफल पूर्णाहुति और प्रसाद रूप में आपको प्राप्त हुआ है।
गौरतलब है कि स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती आद्य शंकराचार्य प्रज्ञाधाम गंगा घोष गाधिपुरी, श्रीमद आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य वैदिक शोध संस्थान काशी, श्रीपीठ गोवर्धन मथुरा, श्रीकृष्ण योगमाया शक्तिपीठ अष्टभुजा तथा श्रीगोकुलम धाम मोतिया झील विंध्याचल के संस्थापक अध्यक्ष हैं। उन्होंने मात्र 27 वर्ष की आयु में सन्यास ग्रहण कर 1095 दिनों में हिमालय से लेकर हिमसेतु तक ऐतिहासिक पदयात्रा की है।
स्वामीजी के स्वागत में कथाव्यास डॉ. राकेश शास्त्री और हरिओम शरण महाराज ने भावपूर्ण उद्बोधन दिया। मुख्य यजमान राधेश्याम द्विवेदी ने अपने चारों भाइयों के साथ तिलक-चंदन, माल्यार्पण, पुष्पांजलि और अंगवस्त्र अर्पित कर महाराजश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में टाउन इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य हरिश्चंद्र दूबे ने विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस पावन अवसर पर डॉ. यूपी द्विवेदी, आचार्य अभिषेक पांडेय, उर्मिला देवी, रामबली यादव, रमेशचंद्र दूबे, अशीत कुमार पाठक, ज्ञानती गोंड़, संजयन त्रिपाठी, डॉ. गोपाल सिंह, अरुणा देवी, गौरव मिश्र, संजय पाठक, आयुष कुमार, राजीव कुमार द्विवेदी, प्रभात कुमार द्विवेदी, आलोक सोनकर, संध्या देवी, संजीव कुमार द्विवेदी, पुष्पा देवी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी भक्तों ने पूर्णाहुति यज्ञ, महाआरती और भंडारे के महाप्रसाद का लाभ ग्रहण कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।



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