सांसारिक मोह त्याग परमात्मा की ओर हों उन्मुख : डॉक्टर राकेश शास्त्री
करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना तहसील अंतर्गत बजरंगनगर हलीमाबाद में जारी श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन गुरुवार को कथा स्थल भक्तिरस से सराबोर रहा। कथावाचक भागवत भूषण डॉ. राकेश शास्त्री ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह, सुदामा चरित तथा राजा परीक्षित के मोह प्रसंग का ऐसा प्रभावी और हृदयस्पर्शी वर्णन किया कि श्रोता भाव-विभोर हो उठे।
इसके पहले मुख्य यजमान राधेश्याम दूबे व संध्या दूबे ने व्यासपीठ का पूजन कर कथा की शरुआत की। अंत में सबने समवेत स्वर में भागवत भगवान की आरती का गान किया। डॉ. शास्त्री ने बताया कि रुक्मिणी जी का अडिग विश्वास यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती। सुदामा चरित मित्रता, निष्कपटता और भगवान की अनुकंपा का सर्वोत्तम उदाहरण है। वहीं परीक्षित मोह की कथा मनुष्य को यह संदेश देती है कि जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए सांसारिक मोह त्यागकर परमात्मा की ओर उन्मुख होना चाहिए।
कथा के दौरान पूरे पंडाल में जय श्रीकृष्ण की ध्वनि गूंजती रही और श्रद्धालु आध्यात्मिक आनंद में डूबे रहे। इस अवसर पर धर्मेंद्र सिंह, तेज पांडेय, राजेंद्र मिश्र श्यामसुंदर चौहान, विष्णु उपाध्याय, सुमित राय, अर्पित उपाध्याय, डाक्टर नेहा दूबे, देवेश दूबे, डाक्टर सुमंत कुमार गुप्ता, शिव शंभु पाठक, शिवचरन तिवारी, अंशा यादव, अखिलेश तिवारी, पूजा राय, अमित राणा, रितिक सिंह, चंद्रकांत तिवारी आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। संचालन अधिवक्ता संजीव द्विवेदी ने किया।





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