भागवत कथा श्रवण करने वालों के हृदय में विराजते हैं भगवान : स्वामी ज्ञानानंद
◆आम्रपाली वैदिक शोध संस्थान में गीता जयंती पर शुरु हुई भागवत कथा
भारत राष्ट्र के प्रख्यात शांकर सन्यासी स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती के नेतृत्व में निकली कलश यात्रा
करहां (मऊ) : आम्रपाली वैदिक शोध संस्थान में सोमवार को गीता जयंती महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा का सप्तद्वीवसीय आयोजन शुरु हुआ। इसके निमित्त एक भव्य कलश यात्रा यज्ञ स्थल से शुरु होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए पीताम्बर बाबा स्थान तक गयी। वहां से वरुण पूजन उपरांत जल लेकर यज्ञ स्थल तक आई।
प्रथम दिवस की भागवत कथा में परम पूज्य परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रीस्वामी ज्ञानानन्द सरस्वतीजी महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवत ग्रन्थ के परम आराध्य परिपूर्णतम ब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्ण चन्द्र ऐसे कृपालु है कि भागवत कथा श्रवण संकल्प करने मात्र से ही मनुष्य के अन्तःकरण में आकर विराजमान हो जाते हैं। उसके समस्त अशुभ अमंगल को स्वयं विनष्ट विनष्ट कर देते हैं और समस्त विपरीत परिस्थितियों को अनुकूल बना देते हैं। श्रृष्णवतां स्वकथां कृष्णः पुण्य श्रवण कीर्तनः हृद्यन्तः स्थोहि अभद्राणि विधुनोति सुहृत्सताम्।
कहा कि सनातन धर्म के सनातन पुरुष की अमोघ वाणी हर एक मानवतनधारी के लिए कित्य स्मर्तव्य है। मैं परमात्मा ही सबका सच्चा मित्र हूँ- सुहृतसताम्। श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह यज्ञ समस्त दुःख, दारिद्र्य व दुर्भाग्य को एक साथ भस्मीभूत कर देता है । शरणागत् पालकत्व धर्मा के सनातन विरद का सिंहनाद साक्षात् श्रीमद्भागवत है। दारिद्रय दुःख ज्वर दाहितानां क्षेमाय वै भागवतं प्रगर्जति।
कहा कि जीव जगत को आसुरी वृत्ति से निवृत्त करके विश्वराष्ट्र को परम सत्वमय, विशुद्ध दैवी शक्तिसम्पन्न बनाने के लिए भारतीय ऋषि मेधा का महत् वैज्ञानिक अनुसंधान श्रीमद्भागवत बोध है। परीक्षित् जीवपद् वाच्य है तक्षक साक्षात् काल सम्बोध्य है। कालः क्रीडति गच्छति आयुः। कालो जगद् भक्षकः देखत काल कराल जिह्वा विविध रूप से जगत् का भक्षण कर रही है। सप्ताह के सात दिन साधनपाद् है आठवां दिन किसी के लिए होता है क्या-? राजर्षि परीक्षित के लिए आठवां दिन कैसे हो गया-? जीवन अवधि मात्र सात दिन श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह यज्ञ का विलक्षण साधनात्मक पारमार्थिक रहस्य है। जिसे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के सद्गुरू परमात्मा श्रीकृष्ण चन्द्र कृष्णं वन्दे जगद्गुरुं" स्वयं उदघाटित करते हैं।
बताया कि श्रीकृष्ण ऐसे जगद्गुरू है जिनका मन्त्रोपदेश मार्तण्ड की प्रचण्ड रश्मियां मन्त्रमुग्ध हो प्रशान्त चित्त से श्रवण करती हैं और स्वयं श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ को मोक्ष का सनातन मार्ग बतलाती हैं। श्रीमद्भागवतान्मुक्तिः सप्ताहं वाचनं कुरु। इति सूर्यवचः सर्वैर्धर्म रूपं तु विश्रुतम्॥
यज्ञ में यज्ञाचार्य डा. धनञ्जय पांडेय, सहयोगी आचार्यगणों अभिषेक तिवारी, एडवोकेट गौरव मिश्र, महेश मिश्र, शुभम तिवारी, विमल मिश्र, आयुष मिश्र, आशीष तिवारी, वैनतेय पांडेय, प्रियव्रत शुक्ल द्वारा मुख्य यजमान उर्मिला सिंह द्वारा विधिवत पूजन-अर्चन कराया गया। इस अवसर पर पंडित हरिओम शरण महाराज, रामविजय सिंह, श्याम चौबे, धीरेंद्र सिंह, अंकित कुमार, ओम कुमार, कृष्ण कुमार, प्रज्ञा सिंह, नेहा सिंह, प्रीति सिंह, कालिन्दी देवी, डाक्टर रामशब्द सिंह सहित अनेक भक्तजन मौजूद रहे।



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