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अहंकार व अन्याय का अंत निश्चित : संपूर्णानंद महाराज

अहंकार व अन्याय का अंत निश्चित : संपूर्णानंद महाराज

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना कस्बे के निकट स्थित बरहदपुर कुटी पर चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन कथावाचक संपूर्णानंद महाराज ने लंका दहन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम के दूत हनुमान जी को रावण की सभा में अपमानित कर उनकी पूंछ में आग लगा दी गई, किंतु वही अग्नि अधर्म के विनाश का कारण बनी और हनुमान जी ने संपूर्ण लंका को भस्म कर दिया।

कथावाचक ने कहा कि अहंकार और अन्याय चाहे जितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, उनका अंत निश्चित है। सच्चा बल भक्ति, सेवा और धर्म में निहित होता है। कथावाचक ने कहा कि लंका दहन के प्रकरण से जुड़ा सुंदरकांड सभी को पढ़ना चाहिए। इससे अहंकार दूर होता है और मन मे सुंदर सुविचार का अभ्युदय होता है। कथा के दौरान पंडाल जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयघोष से गूंज उठा। अंत में आरती व प्रसाद वितरण किया गया।

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