लक्ष्मी-नारायण मंदिर करहां में गूंजी रामकथा की तैयारी, भंडारे की खुशबू से महकेगा गांव
करहां, (मऊ) : रविवार की संध्या जब दीपों की लौ हवा से बतियाने लगी, उसी पावन पहर क्षीरसागर लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर श्रद्धा, संवाद और संकल्प का साक्षी बना। सायं 6:30 बजे मंदिर प्रांगण में आयोजित आवश्यक बैठक केवल औपचारिकता नहीं थी, बल्कि आस्था की धड़कनों और विकास के स्वप्नों का संगम थी। बैठक में जुटे श्रद्धालु, समिति सदस्य और क्षेत्र के गणमान्य जन ऐसे लगे मानो विचारों की आरती उतार रहे हों। संवाद के हर स्वर में मंदिर के उत्कर्ष की चिंता थी और हर नज़र में सेवा का भाव।
इसी क्रम में सर्वसम्मति से यह पावन निर्णय लिया गया कि 31 जनवरी को मंदिर परिसर रामायण की अमृतधारा से सिंचित होगा। रामकथा के पाठ के माध्यम से गांव की फिज़ा में आध्यात्मिक सुवास घुलेगी और सामाजिक समरसता का दीप प्रज्ज्वलित होगा। और जब कथा की गूंज थमेगी, तब अगले दिन यानी 1 फरवरी को विशाल भंडारे की रसधार बहाई जाएगी, जहां श्रद्धा थाली बनेगी और सेवा प्रसाद। क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं व ग्रामीणों को प्रेमपूर्वक आमंत्रित करने का भी निश्चय किया गया।
बैठक में मंदिर के समग्र विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी गहन मंथन हुआ। जैसे भविष्य की नींव आज ही रख दी गई हो। जहां रामकथा बहे, वहां कलह ठहर जाए, जहां भंडारा सजे, वहां हर दिल मुस्कराए। क्षीरसागर मंदिर करहां अब सिर्फ एक आस्था-स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता का केंद्र बनता जा रहा है।




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