संस्कारयुक्त शिक्षा से ही होगा समाज का उत्थान : धर्मराज शास्त्री
करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना स्थित बरहदपुर स्थित कुटी पर आयोजित श्रीराम कथा के पांचवें दिन बुधवार को कथा व्यास पंडित धर्मराज शास्त्री महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के साथ संस्कार का समावेश अत्यंत जरूरी है। केवल किताबी ज्ञान से नहीं, बल्कि संयम, नैतिक मूल्यों और परहित की भावना से ही समाज का समुचित विकास संभव है।
उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि श्रीराम ने अयोध्या में शिक्षा प्राप्त की, किंतु उनके संस्कारों की पहचान तब हुई जब राजा दशरथ ने लोककल्याण हेतु अपने प्रिय पुत्र राम और लक्ष्मण को संत विश्वामित्र के साथ भेजा। कथा व्यास ने अहिल्या उद्धार प्रसंग के माध्यम से बताया कि भगवान श्रीराम ने यह संदेश दिया कि जिन्हें समाज तिरस्कृत करता है, उनका भी उद्धार संभव है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन मानव कल्याण और परहित के आदर्शों से परिपूर्ण रहा।

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