वेशभूषा से कोई साधु या महात्मा नहीं होता : कौशिक महाराज
करहां (मऊ) : करहां परिक्षेत्र के तिलसवां राजापुर में चल रही सात दिवसीय शतचंडी महायज्ञ के अंतर्गत शुक्रवार को रामकथा के दौरान कौशिक महाराज ने सीता हरण का मार्मिक प्रसंग सुनाया। कहा कि रावण ने साधु का वेश धारण कर माता सीता का हरण किया, जिससे यह संदेश मिलता है कि केवल वेशभूषा से कोई साधु या महात्मा नहीं बन जाता।
कथा के दौरान उन्होंने बताया कि साधुता और महानता व्यक्ति के चरित्र और आचरण में निहित होती है। उन्होंने समाज को सावधान करते हुए कहा कि आज के समय में भी हमें बाहरी आडंबर से बचकर सच्चे संत और असंत की पहचान करनी चाहिए। जब-जब समाज में अशांति बढ़ती है, तब संतों के मुख से रामकथा का श्रवण ही शांति और भक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
सीता हरण का प्रसंग सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथा के दौरान भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। अंत में सबने समवेत स्वरु आरती का गान कर प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर जेपी पांडेय, इंद्रदेव सिंह, धीरज कुमार, चंचल सिंह, सतीश कुमार, सोनू सरोज सहित सैकड़ों श्रद्धालुभक्त उपस्थित रहे

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