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वेश नहीं, आचरण से प्रकट होती है साधुता : कौशिक महाराज

वेश नहीं, आचरण से प्रकट होती है साधुता : कौशिक महाराज

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के तिलसवां की पावन धरती पर प्रज्वलित शतचंडी महायज्ञ की दिव्य अग्नि के बीच शुक्रवार को रामकथा का प्रवाह जब सीता हरण प्रसंग पर पहुँचा, तो वातावरण करुणा और चेतना से एक साथ भर उठा। कथाव्यास कौशिक महाराज ने अपने ओजस्वी वचनों से स्मरण कराया कि वेशभूषा मात्र आवरण है। साधुता तो चरित्र की तपिश और आचरण की पवित्रता में जन्म लेती है।

उन्होंने कहा, रावण ने साधु का रूप धरकर माता सीता का हरण किया था। यह प्रसंग केवल इतिहास नहीं, एक अनंत संदेश है। बाहरी आडंबर के पीछे छिपे छल को पहचानने की सीख। “वेश से नहीं, विचार और व्यवहार से महात्म्य प्रकट होता है,” उन्होंने श्रद्धालुओं को सावधान करते हुए कहा। आज भी समय की धारा में अनेक मुखौटे तैर रहे हैं; अतः सजग रहकर सच्चे संत और असंत की पहचान करना समाज का दायित्व है।

कथा की मार्मिकता ऐसी थी कि सीता की व्यथा सुनते-सुनते अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं। भजन-कीर्तन की मधुर स्वर-लहरियों ने पूरे परिसर को भक्ति के रंग में रंग दिया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो शब्द नहीं, स्वयं भाव बोल रहे हों और प्रत्येक हृदय रामनाम की शरण में झुक गया हो।

अंत में समवेत स्वर में हुई आरती ने वातावरण को और अधिक आलोकित कर दिया। प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर जेपी पांडेय, इंद्रदेव सिंह, धीरज कुमार, चंचल सिंह, सतीश कुमार, सोनू सरोज सहित सैकड़ों श्रद्धालु भक्तिभाव से उपस्थित रहे।

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