होली मिलन समारोह से परंपरा को संजोने की हो रही कोशिश
•विगत चार वर्षों से होली मिलन व सम्मान समारोह का हो रहा आयोजन
•8 मार्च को गुरादरी मठ के नवनिर्मित सभागार में गूंजेंगी होली की स्वरलहरियां
करहां (मऊ) : जहां एक ओर समय के साथ होली-फाग व चैता के पारंपरिक गायन की स्वस्थ परंपराएं डीजे और आधुनिक शोरगुल के बीच सिमटती जा रही हैं, वहीं कुछ जागरुक और सकारात्मक सोच रखने वाले लोग आज भी इन्हें सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। ऐसी ही एक सराहनीय पहल करहां स्थित गुरादरी मठ में विगत चार वर्षों से होली मिलन एवं सम्मान समारोह के रुप में आयोजित की जा रही है। इस आयोजन के माध्यम से जहां एक ओर नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति और लोकपरंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं फाग-चैता जैसी समृद्ध लोकगायन परंपरा को जीवित रखने की भी सार्थक कोशिश हो रही है। यह आयोजन हर वर्ष क्षेत्र में सांस्कृतिक चेतना, आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है।
कार्यक्रम के संयोजक, पूर्व वायु सैनिक व किसान नेता नागेंद्र सिंह ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता तथा ग्रामीण परंपराओं को अक्षुण्ण बनाए रखना है। उन्होंने बताया कि महाराणा प्रताप सेना के सौजन्य से आयोजित यह कार्यक्रम बाबा घनश्याम साहब की पावन धरती पर भगवान श्रीराम, भारत माता, सनातन संस्कृति एवं राष्ट्र धर्म रक्षक महाराणा प्रताप के चित्र पर पूजन-अर्चन व माल्यार्पण के साथ प्रारंभ होता है। इसके पश्चात फाग-चैता की स्वरलहरियां गूंजती हैं तथा विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों का सम्मान किया जाता है। कार्यक्रम में क्षेत्र के सुप्रसिद्ध एवं नवोदित संगीत कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधते हैं।











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