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चांदी के मुकुट से जगमगाया श्रीराम-जानकी दरबार, भक्ति में डूबी अष्टमी की संध्या

चांदी के मुकुट से जगमगाया श्रीराम-जानकी दरबार, भक्ति में डूबी अष्टमी की संध्या

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के नगपुर गांव का श्रीराम-जानकी मंदिर कुछ यूँ सजा, मानो आस्था ने खुद चांदनी ओढ़ ली हो। शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर जब प्रभु श्रीराम का दरबार सजा, तो चांदी के मुकुट की चमक में श्रद्धा की रौशनी और भी निखर उठी। घंटों की गूंज, शंख की ध्वनि और भक्ति के सुरों के बीच पूरा वातावरण मानो राममय हो गया।

इस दिव्य श्रृंगार के पीछे एक ऐसी कहानी है, जो दिल को छू जाए। जमुई गांव की 99 वर्षीय ज्योतिया देवी जिनकी उम्र भले ही सदी के करीब हो, लेकिन आस्था आज भी उतनी ही युवा है। उन्होंने अपनी वर्षों की छोटी-छोटी बचत को भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया। मितव्ययिता की मिसाल बनी इस श्रद्धामयी माता ने चार चांदी के मुकुट बनवाकर राम, जानकी, लक्ष्मण और हनुमानजी को अर्पित किए।

उनके पुत्र विजयदास के हाथों जब ये मुकुट मंदिर पहुंचे, तो वह सिर्फ चांदी का आभूषण नहीं, बल्कि मां की भक्ति, त्याग और प्रेम का प्रतीक बन चुके थे। मंदिर के पुजारी महातम तिवारी ने विधि-विधान से शुद्धिकरण कर, घड़ी-घंटा और शंखनाद के बीच जब प्रभु का श्रृंगार किया, तो लगा मानो स्वयं अयोध्या की झलक नगपुर में उतर आई हो।

उस पल हर आंख में श्रद्धा थी, हर दिल में सुकून- ना सोने का लोभ, ना चांदी की चाह, बस प्रभु के चरणों में अर्पित हर एक राह। जो दिल से दिया, वही सबसे बड़ा दान, भक्ति में ही बसता है सच्चा भगवान। इस पावन अवसर पर अनिरुद्ध पांडेय, मुन्ना तिवारी, यादवेंद्र तिवारी, प्रशांत त्रिपाठी, प्रभुनाथ लेखपाल, शमशेर आलम, आख़िला द्विवेदी समेत अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने इस दिव्य क्षण को अपनी आँखों में सहेज लिया।



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