करहां की बहू एसडीएम शालिनी मौर्या के संघर्षों व सफलता की कहानी
•आर्थिक तंगी में ट्यूशन पढ़ा बनी उप जिलाधिकारी
•अपने कार्यो व फैसलों से आयरन लेडी की बनाई पहचान
करहां (मऊ) : मऊ जनपद के करहां गांव की बहू और उत्तराखंड प्रशासनिक सेवा की तेजतर्रार अधिकारी शालिनी मौर्या आज संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल बन चुकी हैं। आर्थिक अभावों में पली-बढ़ी शालिनी मौर्या ने अपने हौसले और कड़ी मेहनत के दम पर प्रशासनिक सेवा में स्थान बनाया और आज वह उत्तराखंड के पौड़ी जनपद के लैंसडौन तहसील में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वह हरिद्वार जैसे महत्वपूर्ण जिले में तहसीलदार और एसडीएम के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। अपने सख्त प्रशासनिक रवैये और कार्यकुशलता के कारण उन्हें लोग ‘आयरन लेडी’ के नाम से भी जानते हैं।
शालिनी मौर्य का जन्म वर्ष 1988 में देहरादून जिले के ऋषिकेश में एक बेहद साधारण और आर्थिक रुप से कमजोर परिवार में हुआ। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को कमजोर नहीं होने दिया। अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्होंने स्वयं ट्यूशन पढ़ाया और उसी से अपनी शिक्षा का खर्च भी उठाया। उनकी लगन का परिणाम यह रहा कि उन्होंने इंटरमीडिएट में कामर्स संकाय से पूरे उत्तराखंड में टाप किया।
उच्च शिक्षा के दौरान भी आर्थिक तंगी उनके सामने बड़ी चुनौती बनी रही, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। एमकाम की पढ़ाई पूरी करने के साथ ही उन्होंने यूजीसी-नेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की। प्रशासनिक अधिकारी बनने की इच्छा इतनी प्रबल थी कि कोचिंग का सहारा लिए बिना ही घर पर रहकर उन्होंने पीसीएस परीक्षा की तैयारी की और वर्ष 2014 में नायब तहसीलदार के पद पर पहली नियुक्ति प्राप्त की। अपनी मेहनत और कार्यकुशलता के बल पर वह आज एसडीएम पद तक पहुंच चुकी हैं। शालिनी मौर्या अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। उनकी माता का विवाह कम उम्र में हो गया था, जिससे वह स्वयं अपने सपनों को पूरा नहीं कर सकीं, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को सफल बनाने का सपना देखा और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उसे आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित किया।
वर्ष 2018 में शालिनी मौर्य का विवाह मऊ जिले के करहां गांव निवासी डाक्टर पियूष मौर्य से हुआ। डा. पियूष मौर्य देहरादून में उद्योगपति और समाजसेवी हैं तथा 84 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्हें कई बार मुख्यमंत्री और राज्यपाल द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। समाजसेवा के कार्यों में पति-पत्नी दोनों की विशेष रुचि है। एक प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ ही शालिनी मौर्या एक गृहिणी और मां की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं। उनका पांच वर्षीय बेटा है, जिसकी परवरिश के साथ वह अपने दायित्वों को संतुलित तरीके से निभाती हैं। शालिनी मौर्य का मानना है कि जीवन में यदि सफलता तुरंत न मिले तो निराश होने के बजाय दुगनी ऊर्जा के साथ मेहनत करनी चाहिए, ताकि सफलता भी अंततः आपको चुनने के लिए विवश हो जाए।



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