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भागवत कथा श्रवण से हरि का हृदय में होता है वास : शुभम आचार्य

भागवत कथा श्रवण से हरि का हृदय में होता है वास : शुभम आचार्य

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक क्षेत्र के नगपुर-महमूदपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर कथावाचक शुभम आचार्य ने भक्तिमय और ज्ञानवर्धक प्रसंगों का मार्मिक वर्णन किया। कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से भगवान श्रीहरि का हृदय में निवास हो जाता है।

कथावाचक ने बताया कि सनकादिकों ने नारद जी को श्रोता बनाकर श्रीमद्भागवत कथा का उपदेश किया। कथा माहात्म्य का ऐसा प्रभाव पड़ा कि भक्ति महारानी अपने पुत्र ज्ञान और वैराग्य के साथ वहां प्रकट हो गईं और भगवान का संकीर्तन करते हुए नृत्य करने लगीं। उन्होंने कहा कि सदा सेव्या सदा सेव्या श्रीमद्भागवती कथा, अर्थात इस अमृतमयी कथा का निरंतर श्रवण करना चाहिए, क्योंकि इसके श्रवण मात्र से भगवान श्रीहरि भक्त के हृदय में विराजमान हो जाते हैं। आचार्य शुभम ने धुंधकारी को गोकर्ण जी द्वारा मोक्ष प्रदान किए जाने, आत्मदेव को भगवद्भक्ति का उपदेश, तथा कथा माहात्म्य की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने श्री शुकदेव जी के जन्म प्रसंग, नारद जी एवं वेदव्यास जी की भेंट तथा नारद जी द्वारा अपने पूर्व जन्म की कथा सुनाकर वेदव्यास जी की चिंता दूर करने का प्रसंग भी सुनाया।

कथा में बताया गया कि वेदव्यास जी ने अपने पुत्र श्री शुकदेव जी महाराज को अष्टादश सहस्त्र मंत्र संहिता रूपी श्रीमद्भागवत महापुराण का उपदेश दिया। साथ ही महाभारत के प्रसंगों के माध्यम से राजा परीक्षित के जन्म तक की कथा का भी श्रवण कराया गया। कथावाचक ने आगे कहा कि भक्ति महारानी के दुखों की निवृत्ति के उद्देश्य से नारद जी बद्री विशाल पहुंचे, जहां उनकी भेंट सनकादिकों से हुई। सनकादिकों ने उन्हें श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण द्वारा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को जागृत करने का उपदेश दिया।

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