कथा माहात्म्य से प्रकट हुआ भक्ति, ज्ञान और वैराग्य
करहां (मऊ) : करहां परिझेत्र के महमूदपुर-नगपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस पर आचार्य शुभम ने सनकादिक ऋषियों द्वारा नारद जी को कथा श्रवण कराने का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि कथा माहात्म्य का प्रभाव इतना अद्भुत था कि भक्ति महारानी अपने पुत्र ज्ञान और वैराग्य के साथ सभा में प्रकट होकर भगवान का संकीर्तन करने लगीं।
कथा में धुंधकारी को गोकर्ण जी द्वारा मोक्ष, आत्मदेव को भक्ति उपदेश, श्री शुकदेव जी का जन्म, नारद-व्यास संवाद तथा महाभारत प्रसंग के साथ राजा परीक्षित के जन्म तक की कथा का संक्षिप्त वर्णन किया गया। आचार्य शुभम ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का नियमित श्रवण मन को शुद्ध करता है और भक्ति, ज्ञान व वैराग्य के माध्यम से मनुष्य को ईश्वर से जोड़कर मोक्ष मार्ग की ओर ले जाता है।
इस अवसर पर विमल मिश्र, बसंती देवी, आशीष तिवारी, रामपत सरोज, प्रियव्रत शुक्ल, प्रभुनाथ राम, विनीत पांडेय, किशुन चौहान, दारा कश्यप, शिवानंद गुप्ता आदि थे।

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