ईश्वर के चरण में झुकने पर खुल जाते हैं जीवन के बंधन : आचार्य शुभम तिवारी
करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक क्षेत्र के नगपुर-महमूदपुर की पुण्य धरा पर सजे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस का दृश्य मानो भक्ति की सरिता में डूबा हुआ प्रतीत हुआ। कथा पंडाल में गूंजते हरिनाम, श्रद्धा से भरे हृदय और आस्था की उजली किरणों के बीच जब कथावाचक आचार्य शुभम तिवारी के श्रीमुख से कथा का अमृत प्रवाहित हुआ, तो श्रोता मानो भावलोक की यात्रा पर निकल पड़े। अपने मर्मस्पर्शी और ओजस्वी उद्बोधन में आचार्य ने कहा जब मन ईश्वर के चरणों में झुक जाता है, तभी जीवन का हर बंधन स्वयं खुल जाता है।
उन्होंने समझाया कि सच्ची शरणागति ही वह दीप है, जो जीवन के अंधकार को मिटाकर मोक्ष के मार्ग को आलोकित करती है। कथा के प्रवाह में सृष्टि की रचना का ऐसा सजीव चित्र उभरा मानो सृष्टि का प्रारंभ आंखों के सामने साकार हो उठा हो। आचार्य ने बताया कि यह समस्त जगत भगवान की माया का अद्भुत विस्तार है और ब्रह्मा जी को सृजन का दायित्व देकर परमात्मा ने इस विराट लीला को गति दी।
भगवान विष्णु के अवतारों मत्स्य, कूर्म, वराह और नरसिंह आदि का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा जब-जब डगमगाया धर्म का आधार, तब-तब प्रभु ने लिया अवतार। इन दिव्य लीलाओं ने श्रद्धालुओं के हृदय में विश्वास और भक्ति की नई ज्योति जगा दी। कपिल भगवान के उपदेशों का स्मरण कराते हुए आचार्य ने कहा कि भक्ति, ज्ञान और वैराग्य जीवन के तीन ऐसे दीप हैं, जो आत्मा के पथ को प्रकाशित करते हैं। स्मरण में जब प्रभु का नाम बस जाता है, तभी मन को सच्चा विश्राम मिल जाता है।
इस पावन अवसर पर मुख्य यजमान रामपत सरोज एवं बसंती देवी सहित विमल मिश्र, बिजेंद्र श्रीवास्तव, किशुन चौहान, आशीष तिवारी, दारा कश्यप, रामनिवास, विनीत पांडेय, प्रभुनाथ राम, प्रियव्रत शुक्ल, श्रीनिवास, अर्जुन राणा समेत अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहकर कथा रस में डूबते रहे।

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