ऐतिहासिक धरोहरों गढ़वा किला, गुरादरी धाम व शमशाबाद कुटी के विकास की उठी मांग
करहां (मऊ) : क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ी गढ़वा किला, मठ गुरादरी धाम और शमशाबाद कुटी जैसी प्राचीन धरोहरें आज संरक्षण और संवर्धन की बाट जोह रही हैं। सैकड़ों वर्षों पुरानी इन स्थलों की ऐतिहासिकता और आध्यात्मिक महत्ता को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने सरकार से इनके संरक्षण एवं पर्यटन स्थल के रुप में विकास की मांग तेज कर दी है।
मिली जानकारी के अनुसार माहपुर ग्रामसभा स्थित गढ़वा किला प्राचीन काल में राजभर शासकों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां समय-समय पर पुरातात्विक अवशेष जैसे मूर्तियां, बर्तन और अन्य सामग्री मिलती रही हैं, जो इसकी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का प्रमाण हैं। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान भी यहां से महत्वपूर्ण अवशेष मिले थे, जिनकी जांच के बाद भी अब तक कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आ सका है। ऐसे में इस स्थल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर इसे संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।
वहीं, मठ गुरादरी धाम लगभग 300 वर्ष पुराना धार्मिक केंद्र है, जहां कई सिद्ध संतों की समाधियां, प्राचीन मंदिर और पौराणिक पाताल गंगा सरोवर स्थित हैं। यह स्थल आस्था का प्रमुख केंद्र होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं और सौंदर्यीकरण के अभाव से जूझ रहा है।
इसी क्रम में शमशाबाद कुटी भी अपनी विशिष्ट पहचान रखती है, जहां प्राचीन सुरंगनुमा गुफा और सिद्ध महात्माओं की समाधियां मौजूद हैं। यह स्थान धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के बावजूद उपेक्षा का शिकार है।
स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि इन धरोहरों का संरक्षण कर योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए, तो यह न केवल क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को संजोएगा, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगा। लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इन स्थलों का पुरातात्विक सर्वेक्षण कर उनकी वास्तविक ऐतिहासिकता को उजागर किया जाए तथा उन्हें संरक्षित कर पर्यटन मानचित्र पर स्थान दिलाया जाए।






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