पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण एवं जल संचयन हेतु बने जलाशय बेपानी
•करहां परिक्षेत्र में खोदे गए थे दर्जन भर गहरे जलाशय
•बेपानी व झाड़-झंखाड़ से भरे गहरे गड्ढे बने जानलेवा
करहां (मऊ) : पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बने 5 वर्ष बीत गए। इसके निर्माण में मिट्टी की आपूर्ति के लिए किनारे स्थित विभिन्न गांवों में गहरे जलाशय खोदे गए थे। उस समय कहा यह गया था कि यह जलाशय भविष्य में जल संचयन में सहयोगी होंगे और इस क्षेत्र के भूमिगत जल का स्तर बना रहेगा जबकि हालत इससे उलट है। इस समय जब पूरा भारत भीषण गर्मी व तपन की चपेट में है, तब यह जलाशय भी बेपानी नजर आ रहे हैं।
बता दें कि मऊ जनपद के 28 किलोमीटर की सीमाक्षेत्र से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर गुजरा है। सबसे ध्यान देने कि बात यह है कि इसमें ज्यादातर एक्सप्रेसवे ऐसी भूमि पर बना है जो इस क्षेत्र का परंपरागत जल का स्रोत रहा है। अर्थात अधिकांश भूमि के ताल क्षेत्र के बीच से ही एक्सप्रेसवे ले जाया गया है, ताकि अधिग्रहण में कम पैसा लगे। सच बात तो ये है कि ताल क्षेत्र में एक्सप्रेसवे बनाकर इस क्षेत्र में जल संचयन को वैसे ही कम कर दिया गया। दूसरे मिट्टी निकालने पर जो 10, 15, 20, 25 व 30 फिट तक के गहरे और खड़े जलाशय बना दिए गए वह जल का संचयन कम बल्कि पशुओं व मनुष्यों के लिए जानलेवा अलग से बन गए हैं। करहां, रसूलपुर, मालव, जमुई, बरडीहा, भांटी, अरैला, करपिया, याकूबपुर, नोहरेपुर आदि गांवों में इतने गहरे और खड़े ढाल वाले जलाशय बना दिए गए हैं, जिसमें गिरकर घायल होने और मौत होने की संभावना हमेशा बनी रहती है।
मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के बरडीहा में शौच करने गए एक व्यक्ति की पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए मिट्टी निकाले गए गहरे गड्ढे में डूबकर मौत हो गई थी। इसी प्रकार घुटमा गांव निवासी एक किशोर की नहाते समय डूबकर मौत हो गई थी। रसूलपुर स्थित इसी तरह के जलाशय के किनारे एक मंदबुद्धि व्यक्ति की लाश मिली थी। इन गड्ढों में अनेक पशुओं व बकरियों की गिरकर मौत हो चुकी है। कुल मिलाकर जल संचयन और पर्यावरण संरक्षण की जिस मंशा से मिट्टी निकालकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बना और गहरे जलाशय बनाकर छोड़ दिए गए वह जल का भंडारण कम बल्कि जानलेवा ज्यादा बनकर रह गए हैं।







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