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होली मिलन व कवि सम्मेलन में देर तक झूमें पत्रकार बंधु

होली मिलन व कवि सम्मेलन में देर तक झूमें पत्रकार बंधु

◆जिले की तीन महान विभूतियों को मऊ रत्न सम्मान

◆पत्रकार एकता व मऊ विकास मंच के कार्यक्रम में जुटे अनेक गणमान्य

◆दिए है आप को इस साल प्रसाद होली में, मुबारक हो मुबारक हो मुबारकबाद होली में : बादशाह प्रेमी

■मऊ। पत्रकार एकता मंच व मऊ विकास मंच के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित होली मिलन व कवि सम्मेलन कार्यक्रम का भव्य आयोजन शनिवार की शाम शहर के सुप्रसिद्ध पालिका कम्यूनिटी हॉल में आयोजित हुआ। इसमें जिले भर के पत्रकार संग अनेक गणमान्य लोग देर रात तक झूमते गाते-गुनगुनाते नज़र आये। इसके अलावा जिले की तीन महान विभूतियों को इस कार्यक्रम में मऊ रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। लोकप्रिय पुलिस अधीक्षक इलामारन जी ने उन्हें अंगवस्त्र, माल्यार्पण व स्मृति चिन्ह प्रदान कर अभिनंदन किया।

गौरतलब हो कि क्या वरिष्ठ क्या कनिष्ठ सभी एक साथ ठिठोली लगा रहे थे। मौका था पत्रकार एकता मंच द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह का जहां देश के प्रख्यात कवियों के काव्य प्रवाह के बीच जनपद के पत्रकारों ने होली मिलन समारोह में एक दूसरे से मिले। जिले के प्रत्येक कोने से आये पत्रकारों को अबीर-गुलाल लगाकर फूलो व अंगवस्त्र प्रदान कर स्वागत किया गया।

पत्रकार एकता मंच द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में देश के प्रख्यात कवियों का समागम हुआ। जिसमें कवियों द्वारा उपस्थित श्रोताओं को अपनी विधाओं से देर रात तक बांधे रखा गया।

इस अवसर पर प्रख्यात चिकित्सक डा. जूड, वयोवृद्ध वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद उपाध्याय व सामाजिक कार्यकर्ता रिटायर्ड फार्मासिस्ट पीएन सिंह को मऊ रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया। जिले के वरिष्ठ पत्रकार राहुल सिंह के द्वारा सभी आगत अतिथियों व पत्रकार बंधुओ का अंगवस्त्र देने के पश्चात स्वागत किया गया। सभी आगंतुकों ने एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर बधाइयां दी। सबने मिलकर गुझिया और नमकीन का आनंद लिया और सहभोज उपरांत विदा हुये।

यह होली मिलन समारोह और कवि सम्मेलन शाम 5:00 बजे से शुरू होकर देर रात्रि तक चलने वाले कार्यक्रम अपने आप में एक अनोखा साबित हुआ, जहां लोगों ने खुले मन से होली का त्यौहार मनाया। जिसकी चर्चाएं होती रही। देर रात्रि तक चले इस कार्यक्रम में सरस्वती वंदना पुरुषार्थ सिंह ने किया। युवा कवि  प्रखर शुक्ला, अश्वनी द्विवेदी,  मुक्तेश्वर पराशर, प्रतिभा यादव, अशोक कुमार अश्क के उपरांत हास्य कवि डंडा बनारसी की कविताओं पर लोग देर तक ठहाका लगाते रहे। पुरुषार्थ सिंह की गीत वर्षा और पंकज प्रखर के ओज के बाद हास्य के बवंडर बादशाह प्रेमी के काव्यपाठ पर हंसी के गोलगप्पे फूटते रहे। अध्यक्षता बादशाह प्रेमी व संचालन पंकज प्रखर ने किया।

अशोक कुमार अश्क ने सुनाया कि- "आग लगाने को बस्ती में काफी एक चिंगारी है, अब रखना महफूज़ घरों को अपनी जिम्मेदारी है।। भाई ने भाई से लड़कर आंगन को तो बांट लिया, अब क्या होगा ड्योढ़ी का ये सोच रही महतारी है। चलो चल के पहले गले तो मिलें फिर, मुहब्बत का मिल के असर देखते हैं।"

तमसा तट के महमशान के कवि हृदय व वरिष्ठ गीतकार पुरुषार्थ सिंह ने सुनाया कि- "कोई दर्द छू रहा है मन के करीब आके,

कैसे भुलाऊं उनको कोई गीत गुनगुना के।'

संचालन कर रहे वीर रस के युवा गीतकार पंकज प्रखर ने कहा कि- "घन घोर तिमिर को भेद यहाँ नव गीतों का स्वर छंद बनो, हे भारत के युवा सिपाही उठो विवेकानंद बनो।"

डंडा बनारसी ने ठहाका लगाने को मजबूर करते हुए सुनाया कि- "दसवी में फेल मै हुआ इतिहास हो गया, फिर पिता जी को मेरे विश्वास हो गया; उस दिन के बाद फिर मुझे जुतियाने लग गये, अंजाम ये हुआ की मै बीए पास हो गया।"

अनेक हास्य मुक्तकों के साथ वरिष्ठ व प्रख्यात कवि बादशाह प्रेमी ने होली की शुभकामनाओं सहित कहा कि- " दिए है आप को इस साल प्रसाद होली में, मुबारक हो मुबारक हो मुबारकबाद होली में-!!

इस अवसर पर हरिद्वार राय, उत्पल राय, विनय जायसवाल, प्रवीण राय, संतोष सिंह, श्रीराम जायसवाल, नागेंद्र राय, ऋषिकेश पांडेय, जयप्रकाश निषाद, रजनीकांत पांडेय, विमलकृष्ण राय, प्रदीप सिंह, पुनीत श्रीवास्तव, चंदन पंडित, विभूति नारायण सिंह, अभिमन्यु दूबे, ज्योति सिंह, प्रियंका राय, विनीता जी, देवप्रकाश राय, अनिल सिंह, किंकर सिंह, अंजनी सिंह, अभिषेक सिंह, संजय यादव, तारकेश्वर सिंह अजीत सहित सैकड़ों गणमान्य एवं वरिष्ठ-कनिष्ठ  पत्रकारगण मौजूद रहे।

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