एक साथ श्रीकृष्ण व योगमाया का हुआ प्राकट्य : आचार्य अनुज
करहां (मऊ) : करहां परिक्षेत्र के लग्गुपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शुक्रवार को देर शाम आचार्य अनुज मिश्रा ने श्रीकृष्णावतार का वृतांत सुनाया। कहा कि एक ही साथ श्रीकृष्ण और भगवती योगमाया का मंगल प्राकट्य हुआ। इसमें से भगवती योगमाया आकाशवाणी करके रथारूढ़ होकर विंध्यक्षेत्र के त्रिकोण पर्वत पर आकर विराजमान हुई।
कथा विस्तार के क्रम में आचार्य अनुज ने बताया कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी बुधवार की मध्यरात्रि में भगवती योगमाया के साथ भगवान श्रीकृष्ण चन्द्र का प्राकट्य हुआ। उस समय वैवस्वत मन्वंतर के अट्ठाइसवें द्वापर का आठ लाख तिरसठ हजार आठ सौ पचहत्तरवां वर्ष व्यतीत हो रहा था। जिस रात्रि को जिस क्षण वृष्णि वंश में श्रीकृष्ण जन्में ठीक उसी क्षण नन्दगोप कुल में भगवती योगमाया ने जन्म ग्रहण किया। आचार्य अनुज ने बताया कि जन्माष्टमी व्रत महोत्सव केवल कृष्ण के साथ नही बल्कि योगमाया सहित श्रीकृष्ण योगमाया जन्माष्टमी व्रत महोत्सव का आयोजन तीर्थ देवालय गृह कुटुम्ब में प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को श्रद्धा व उत्साह पूर्वक करना चाहिए।
इस अवसर यज्ञाचार्य पंडित विवेक पांडेय, मुख्य यजमान धर्मेंद्र प्रताप सिंह तोमर, तारा देवी, खंड कार्यवाह धर्मेंद्र सिंह, युवा भाजपा नेता कुणाल सिंह अंकित, राणा प्रताप दूबे, चंदन पांडेय, राजन सिंह, अमरनाथ, पिंटू गोंड़, विमलेंद्र सिंह सहित सैकड़ों स्त्री-पुरुष श्रद्धालु गण उपस्थित रहे।


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