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पिता के आदर्शों पर चलकर बिटिया बनी सिविल जज

पिता के आदर्शों पर चलकर बिटिया बनी सिविल जज

करहां (मऊ) : फादर्स डे के अवसर पर जब लोग अपने पिता के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं, तब मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के शमशाबाद निवासी सिविल जज/न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, मुरैना (मध्य प्रदेश) रिया सिंह ने अपने पिता हरिनारायण सिंह के प्रति भावपूर्ण श्रद्धा व्यक्त की है।

रिया सिंह ने बताया कि उनके पिता हरिनारायण सिंह का जन्म शमशाबाद गांव के एक अत्यंत साधारण किसान परिवार में हुआ था। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी लगन, अनुशासन और अथक परिश्रम के बल पर पीसीएस अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया। उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ शासकीय सेवाएं प्रदान कीं तथा कृषि विभाग में विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करते हुए रायबरेली में कृषि उपनिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए।

रिया सिंह के अनुसार उनके पिता ने हमेशा शिक्षा, संस्कार, अनुशासन और मेहनत को जीवन का मूल मंत्र माना। उन्हीं के मार्गदर्शन और प्रेरणा का परिणाम है कि उन्होंने पीसीएस (जे) परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्तमान में सिविल जज/न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के रुप में न्यायिक सेवाएं प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता केवल परिवार के मुखिया ही नहीं, बल्कि उनके जीवन के आदर्श, प्रेरणास्रोत और सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं। सेवानिवृत्ति के बाद भी हरिनारायण सिंह समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं और वर्तमान में जेके मेमोरियल पब्लिक स्कूल, दरौरा के प्रबंधक के रुप में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।

फादर्स डे पर रिया सिंह ने भावुक होकर कहा, “पिता वो छत हैं, जो हर धूप में साया बन जाते हैं। उनकी खामोश मेहनत और त्याग ही बच्चों की सफलता की असली नींव होती है। मेरे पिता मेरे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं और मैं उनकी दी हुई सीखों को हमेशा अपने जीवन में उतारने का प्रयास करती रहूंगी।” फादर्स डे के इस विशेष अवसर पर पिता-पुत्री की यह प्रेरक कहानी न केवल पारिवारिक मूल्यों को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि एक पिता के संस्कार और संघर्ष किस प्रकार आने वाली पीढ़ियों के जीवन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।



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