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अपने कार्य व व्यवहार से मर्यादा पुरुषोत्तम बने राम : भूपेंद्र दास

अपने कार्य व व्यवहार से मर्यादा पुरुषोत्तम बने राम : भूपेंद्र दास

करहां (मऊ) : करहां परिक्षेत्र के शमशाबाद में चल रही रुद्र महायज्ञ के छठवें दिन वेदी पूजन, हवन, आरती, परिक्रमा के उपरांत रामकथा सुनाई गई। मानस मर्मज्ञ भूपेंद्र दास महाराज ने भगवान राम के जन्म की मंगलमयी कथा सुनाई। बताया कि प्रभु श्रीराम अपनी धर्म नीति, कार्य व व्यवहार से मर्यादा पुरुषोत्तम का दर्जा पाये। हम सबको भी अपने जीवन में प्रभु श्रीराम की मर्यादा व आचरण का अनुकरण करना चाहिये।

कथा विस्तार के क्रम में भूपेंद्रदास ने बताया कि परमात्मा का अवतार धर्म की रक्षा के लिए होता है। जब पृथ्वी पर गौ, ब्राह्मण, देवता और संतों का अपमान होता है, तब उनकी रक्षा व पृथ्वी का भार दूर करने के लिए परमात्मा का प्राकट्य होता है। अयोध्या में प्रभु श्रीराम का अवतार भी इन्हीं परिस्थितियों के मध्य हुआ। महाज्ञानी दशरथ और कौशल्या अति प्रसन्न हुये। पूरी अयोध्या नगरी में भव्य उत्सव मनाया गया। प्रभु श्रीराम ने समाज में सभ्यता, संस्कृति, संस्कार व मर्यादा का कीर्तिमान स्थापित किया। प्रभु श्रीराम अपने माता, पिता व गुरु की आज्ञा के अनुसार ही अवध नगरी के सभी कार्यो को करते थे। इससे उनकी सारी प्रजा बहुत प्रसन्न होती थी। रामचंद्र ने अपने पूरे जीवन  में कभी भी कोई ऐसा कार्य नहीं किया जिससे धर्म, नीति और मर्यादा का हनन हो। इसलिए ही तो उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया।

इस अवसर पर यज्ञकर्ता रामकृष्ण दास महाराज, मुख्य यजमान नारायण दास, यज्ञाचार्य कपिलदेव शास्त्री, संतोष तिवारी, रामनारायन गुप्ता, योगेंद्र दास, बालक दास, विजय दास, कमलेश सरोज, प्रमोद मद्धेशिया, दिनेश सरोज सहित सैकड़ों स्त्री-पुरुष श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।

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