गढ़वा किले के संरक्षण की उठी मांग, संस्कृति मंत्रालय से की अपील
•5 वर्षों बाद भी खुदाई में मिले अवशेषों की नहीं आई जांच रिपोर्ट
•कथित राजभर राजाओं के किले के रहस्य से नहीं उठा पर्दा
करहां (मऊ) : जनपद मऊ के मुहम्मदाबाद गोहना तहसील अंतर्गत ग्रामसभा माहपुर स्थित ऐतिहासिक गड़वा किले के संरक्षण और सौंदर्यीकरण को लेकर एक बार फिर आवाज उठाई गई है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता डाक्टर पंचम राजभर द्वारा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय सहित भारतीय पुरातत्व विभाग एवं उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।
बता दें कि यह किला या कोट कथित रुप से राजभर राजाओं का माना जाता रहा है। यहां आज भी किले के अवशेष, दीवारें, पत्थर, मूर्तियां, मुहरें या सिक्के पाए जाते हैं। हालांकि अनचाही अनहोनी के कारण कोई इसका प्रयोग नहीं करता। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण के समय यहां मिट्टी की खुदाई के दौरान यहां पुनः पुरातात्विक अवशेष के रुप मे बर्तन, मूर्तियां व सिक्के मिले थे। सूचना पर तत्कालीन डीएम अमित बंसल, एडीएम आदि मयफोर्स वहां पहुंचे और वाराणसी से पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों को बुलाकर अवशेष जांच हेतु भेजवाया। तभी से वहां 100 मीटर के व्यास में बोर्ड लगाकर क्षेत्र को संरक्षित कर दिया गया है। उस क्षेत्र में कोई खुदाई या स्थायी निर्माण पर रोक लगाई गई है। हालांकि कोट की सारी भूमि वर्तमान में भूमिधरी घोषित है उसपर खेती किसानी होती है। इसलिए किले के रहस्य से पर्दा उठाने के लिए पुरातात्विक अवशेषों की जांच रिपोर्ट आना आवश्यक है, ताकि किसानों में उस भूमि को लेकर असमंजस की स्थिति न रहे।
डाक्टर पंचम राजभर द्वारा भेजे गए पत्र में बताया गया है कि गड़वा की कोट प्राचीन काल में कोल-भर शासकों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद आज तक न तो स्थल का समुचित सीमांकन कराया गया है और न ही वहां किसी प्रकार का सूचना बोर्ड, शिलालेख अथवा संरचनात्मक विकास कार्य कराया गया है। परिणामस्वरुप यह ऐतिहासिक स्थल अतिक्रमण और उपेक्षा का शिकार हो रहा है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि स्थानीय स्तर पर कई बार इस संबंध में अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे क्षेत्रीय लोगों में निराशा का माहौल है। पिछले माह 26 फरवरी 2026 को क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी वाराणसी/आजमगढ़ मंडल डाक्टर रामनरेश पाल द्वारा स्थल का निरीक्षण भी किया गया था, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
डाक्टर पंचम राजभर ने मांग की है कि गढ़वा किले या कोट को अतिक्रमण मुक्त कराते हुए वहां बोर्ड, शिलालेख एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित कर इसे एक संरक्षित पर्यटन स्थल के रुप में विकसित किया जाए। साथ ही इसके लिए आवश्यक धनराशि स्वीकृत कर सुंदरीकरण का जल्द कार्य शुरु कराया जाय। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा और देखरेख नहीं की गई, तो इसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।







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