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अधिरोहण के सेवा दीपों से रोशन हो रही बुजुर्गों की दुनियां

अधिरोहण के सेवा दीपों से रोशन हो रही बुजुर्गों की दुनियां

करहां (मऊ) : जब संवेदनाओं की मिट्टी में सेवा का बीज बोया जाता है, तो उसके फलस्वरूप करुणा और अपनत्व के सुंदर वृक्ष उगते हैं। कुछ ऐसा ही दृश्य इन दिनों अधिरोहण सामाजिक संस्थान द्वारा संचालित वृद्धाश्रम में देखने को मिल रहा है, जहां निस्वार्थ सेवा की अलख अब समाज के हृदयों को भी स्पंदित करने लगी है।

अधिरोहण की सतत कोशिशों ने लोगों के भीतर सोई संवेदनाओं को जगाया है। यही कारण है कि अब समाज के विभिन्न वर्गों से लोग स्वयं आगे बढ़कर वृद्धजनों के जीवन में मुस्कान बिखेरने का प्रयास कर रहे हैं। इस सेवा यात्रा में साधना प्रसाद ने सहारे के रूप में वॉकर भेंट किया, तो पवन प्रधान ने मच्छरदानियां देकर बुजुर्गों की सुरक्षा का ध्यान रखा। बीना राय ने वस्त्र सेवा के माध्यम से स्नेह का स्पर्श पहुंचाया, वहीं मोनी राय ने दैनिक उपयोग की सामग्री और कपड़े देकर अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

इतना ही नहीं, आश्रम के बुजुर्गों के लिए फल, मौसम की सौगात कच्चे आम का मीठा अचार तथा अन्य खाद्य सामग्री भी भेंट की गई। इन उपहारों में केवल वस्तुएं नहीं थीं, बल्कि उनमें सम्मान, अपनत्व और प्रेम की भावना भी समाहित थी। सहयोग पाकर वृद्धाश्रम के बुजुर्गों के चेहरे खिल उठे। उन्होंने भावुक होकर कहा कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयास उनके जीवन में खुशियों की नई किरण लेकर आते हैं और यह एहसास कराते हैं कि समाज आज भी उन्हें भूला नहीं है।

संस्थान की संस्थापिका ने कहा कि अधिरोहण का लक्ष्य केवल सेवा प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदना और जिम्मेदारी की भावना को जागृत करना है। उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से बोए गए सेवा और समर्पण के बीज अब अंकुरित होने लगे हैं। लोग स्वयं आगे आकर इस पुनीत कार्य में सहभागी बन रहे हैं, जो एक सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। वास्तव में, जब समाज अपने अनुभवों की धरोहर बने बुजुर्गों का हाथ थामता है, तब केवल उनका जीवन ही नहीं संवरता, बल्कि मानवीय मूल्यों की वह ज्योति भी प्रज्वलित होती है, जो आने वाली पीढ़ियों को संवेदनशील समाज का मार्ग दिखाती है।

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