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गढ़वा किले के पुरातात्विक अवशेषों की जांच रिपोर्ट पांच साल बाद भी अधर में

गढ़वा किले के पुरातात्विक अवशेषों की जांच रिपोर्ट पांच साल बाद भी अधर में

•संरक्षण और पर्यटन विकास की उठी मांग

•पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित भूमि के कारण किसानों में उहापोह

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के माहपुर ग्रामसभा स्थित गढ़वा मौजे में फैले ऐतिहासिक किले से जुड़े पुरातात्विक अवशेषों की जांच रिपोर्ट पांच साल बाद भी सार्वजनिक नहीं हो सकी है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान हुई खुदाई में मिले अवशेषों को लेकर जहां एक ओर रहस्य बरकरार है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने किले के संरक्षण और पर्यटन विकास की मांग तेज कर दी है।

जानकारी के अनुसार करीब पांच वर्ष पूर्व पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए मिट्टी की खुदाई के दौरान गढ़वा किले के आसपास बर्तन, मूर्तियां, सिक्के और अन्य प्राचीन अवशेष मिले थे। तत्कालीन जिलाधिकारी अमित कुमार बंसल के निर्देश पर मौके पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ वाराणसी से पुरातत्व विभाग की टीम पहुंची थी। टीम ने अवशेषों के नमूने एकत्र कर जांच के लिए ले लिए थे। इसके बाद 100 मीटर की परिधि क्षेत्र को संरक्षित घोषित करते हुए वहां किसी भी प्रकार की खुदाई और स्थायी निर्माण पर रोक लगा दी गई थी।

हालांकि पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी इन अवशेषों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो पाई है, जिससे क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं और सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ये अवशेष किस कालखंड से संबंधित हैं और गढ़वा किले का वास्तविक ऐतिहासिक महत्व क्या है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह स्थल 1700 साल पहले कभी राजभर राजाओं के शासन से जुड़ा रहा है, जबकि खुदाई के बाद कुछ लोगों ने इसे बौद्ध और मौर्य काल से भी जोड़कर देखा है। लंबे समय से इस किले के संबंध में अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं, जिससे इसका ऐतिहासिक रहस्य और भी गहरा हो गया है।

इसी बीच हाल ही में सामाजिक कार्यकर्ता डाक्टर पंचम राजभर ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग को पत्र भेजकर गढ़वा किले के संरक्षण, सीमांकन और सौंदर्यीकरण की मांग उठाई है। पत्र में कहा गया है कि यह स्थल कोल-भर शासकों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद आज तक यहां न तो उचित सीमांकन हुआ है और न ही सूचना बोर्ड या शिलालेख लगाए गए हैं।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी द्वारा 26 फरवरी 2026 को स्थल का निरीक्षण किया गया था, लेकिन इसके बाद भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि संरक्षित क्षेत्र घोषित होने के बावजूद भूमि का अधिकांश हिस्सा अभी भी खेती योग्य है, जिससे ग्रामीणों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों और विभिन्न संगठनों ने मांग की है कि पुरातत्व विभाग जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करे और गढ़वा किले को विकसित कर इसे पर्यटन स्थल के रुप में स्थापित किया जाए, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान संरक्षित रह सके और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिले।

1 Comments

  1. दिनाँक 28 जून 2026 ईमेल --
    महत्वपूर्ण/तत्काल- प्रतिष्ठामें,
    माननीय मंत्री जी
    संस्कृति/पर्यटन मंत्रालय
    भारत सरकार नई दिल्ली
    *सन्दर्भ* -- संस्कृति/पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार/उ प्र सरकार-भारतीय पुरातत्व/उ प्र राज्य पुरातत्व विभाग -
    विषय - अद्यतन उ प्र के जनपद मऊ में स्थित वर्ष 1967 ई में तत्समय एस एस आई पटना सर्किल द्वारा संरक्षित भर राजाओं की गढ़वा की कोट के सीमांकन/अधिग्रहण/फिनिशिंग/बोर्ड आदि लगाए जाने एवं सुंदरीकरण किये जाने के संबंध में 11वां अनुस्मरण पत्र -
    महोदय,
    कृपया उपर्युक्त विषयक के संबंध में सादर आपका ध्यान आकृष्ट कराना है कि उ प्र के तत्समय 1967 में जनपद आज़मगढ़ के तहसील मोहम्दाबाद गोहना के ग्राम सभा भतरी,गड़वा में स्थित वर्तमान में स्थित प्राचीन काल की प्रसिद्ध भर/राजभर शासकों की गड़वा की कोट जिसके पुरातात्विक महत्ता को देखते हुए संभवतः 1967 ई में भारतीय पुरातत्व विभाग की पटना सर्किल द्वारा साइट सं 112 राजकीय संरक्षण में अधिसूचित की गई । उक्त के संबंध में निवेदित है कि विगत कई वर्षों से मेरे द्वारा एवं कुछ अन्य साथियों द्वारा लिखित रूप से तत्सम्बन्धित द्वारा कोट आदि को अतिक्रमण मुक्त कर विधिवत अधिग्रहण कर सुंदरीकरण कराये जाने की मांग की जा रही है लेकिन अभी तक उक्त अनुरोध के क्रम में भारतीय पुरातत्व/उ प्र राज्य पुरातत्व/पर्यटन विभाग आदि द्वारा कोई विधिक रूप से कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं हो रही है। जिससे एक भारतीय पुरातन संस्कृति सभ्यता विलुप्त होती जा रही है । निष्पक्ष न्यायसंगत समुचित कार्यवाही से आमजनता ने निराशा की भावना बलवती हो रही है ।
    अतः आपसे प्रबल अनुरोध है वर्णित परिस्थितियों में प्राचीन कालीन रहस्यमयी सांस्कृतिक सभ्यता के पुरातात्विक स्थल का परीक्षण,उत्तखनन,शोध,अध्ययन,लेखन,संकलन,प्रकाशन आदि को क्रमबद्ध तरीक़े से किये जाने का तत्सम्बन्धित को निर्देशित करने का कष्ट करें ।
    आभारी रहूंगा कि कृत कार्यवाही से हमें भी अवगत कराने का कष्ट करेंगे ।
    सम्मान सहित
    संलग्नक -यथोपरि
    प्रतिलिपि - तत्सम्बन्धित को समुचित कार्यवाही हेतु सादर सूचनार्थ सम्प्रेषित ।
    भवदीय
    डॉ पंचम राजभर
    सोशल एक्टिविष्ट -ex संपादक सुहेलदेव स्मृति मा प -आवास कुरथुवा, सोनहरा, बरदह जनपद आज़मगढ़ उ प्र- drprajbhar1962@gmail.com-9889506050/9452292260

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