बुजुर्गों का आशीर्वाद… सेवा की सबसे बड़ी पूंजी
करहां (मऊ) : सेवा केवल जरुरतमंद तक सहायता पहुंचाने का नाम नहीं, बल्कि किसी बुजुर्ग के पास बैठकर उनका हाल पूछ लेना, उनकी स्मृतियों को सुनना और उनके चेहरे पर मुस्कान ला देना भी सेवा का ऐसा भाव है, जिसकी अनुभूति शब्दों से परे है। इसी आत्मीय भावना के साथ अधिरोहण सेवा संस्थान की ओर से नगर के प्राचीन एवं प्रतिष्ठित क्षेत्र हरिकेशपुरा-बल्लिपुरा में क्षेत्र के वयोवृद्ध एवं सम्मानित नागरिकों से भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना गया और फल आदि भेंट किए गए।
इसी क्रम में नगर के प्रतिष्ठित स्वर्ण व्यवसायी एवं वयोवृद्ध जयराम वर्मा से आत्मीय मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और स्नेह व आशीर्वाद प्राप्त किया गया। क्षेत्र के अन्य वरिष्ठजनों से भी मिलकर उनके जीवनानुभवों और पुरानी स्मृतियों को करीब से जानने का अवसर मिला। इस आत्मीय सेवा यात्रा में शारदा त्रिपाठी का भी सहयोग रहा। सेवा संस्थान से जुड़े लोगों का कहना है कि बुजुर्गों की आंखों में झलकता अपनापन और उनके होंठों से निकली दुआएं ही सेवा की सबसे बड़ी पूंजी और सम्मान हैं। सेवा के साथ संवेदना और संवेदना के साथ अपनापन ही इस पहल का मूल भाव है।

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