किसान परिवार व रामलीला के मंच से संविधान विशेषज्ञ तक का अनोखा सफर
•करहां परिक्षेत्र के नगपुर गांव से निकलकर विधि विशेषज्ञता हासिल किया बड़ा मुकाम
•शिक्षक, लेखक व सोसल मीडिया प्लेटफार्म पर आकर देशवासियों को कर रहे जागरुक
करहां (मऊ) : करहां परिक्षेत्र के नगपुर गांव में किसान परिवार में जन्मे पंकज कुमार त्रिपाठी की जीवनयात्रा ग्रामीण परिवेश से विधि-शिक्षण और संवैधानिक विमर्श तक पहुंचने की एक प्रेरक कहानी है। 29 नवंबर 1976 को जन्मे त्रिपाठी का बचपन खेती-किसानी और पशुपालन के बीच बीता। बचपन से ही तर्कपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की क्षमता देखकर उनकी भाभी आशा त्रिपाठी ने महज नौ वर्ष की उम्र में उन्हें ‘वकील साहब’ कहना शुरु कर दिया था। परिवार के इसी संबोधन को उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। बड़े भाई अरविंद कुमार त्रिपाठी के सहयोग से उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से वर्ष 1996 से 1999 के बीच एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वर्ष 2000 में न्यायिक सेवा की तैयारी के लिए प्रयागराज पहुंचे, जहां कानून के जटिल प्रावधानों को सरलता से समझाने की उनकी क्षमता ने उन्हें विद्यार्थियों के बीच अलग पहचान दिलाई। गांव की रामलीला के मंच से जुड़े अनुभवों सहित ग्रामीण जीवन के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया।
न्यायिक सेवा की तैयारी से विधि-शिक्षण तक वर्ष 2003 में न्यायिक सेवा की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने विद्यार्थियों को तैयार करने और कानून की शिक्षा देने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। वर्ष 2005 से दिल्ली सहित उत्तर भारत के विभिन्न संस्थानों में विधि-शिक्षण किया और 2007 में ‘पंकज विधि प्रवाह’ नाम से अपना संस्थान स्थापित किया। पुस्तकों के लेखन, प्रशिक्षण और यूट्यूब के माध्यम से कानून की शिक्षा को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के प्रयासों से उनकी पहचान एक विधि-शिक्षक के रुप में बनी। उनके जीवन-वृत्त के अनुसार उनके मार्गदर्शन में अनेक विद्यार्थी न्यायिक सेवा, अधिवक्ता, प्रोफेसर तथा विभिन्न सरकारी संस्थानों में विधिक पदों तक पहुंचे। वर्ष 2018 से 2020 के बीच उन्होंने विधि विषयों पर पुस्तकें भी लिखीं। उनके शैक्षणिक कार्यों में विभिन्न राज्यों के अधिकारियों को कानून का प्रशिक्षण देने और उत्तराखंड राज्य लोक सेवा आयोग की न्यायिक सेवा परीक्षा से संबंधित पैनल में शामिल होने का उल्लेख भी मिलता है। उनकी इस यात्रा में पत्नी संध्या त्रिपाठी का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा।
संविधान के अध्ययन से सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता तक विधि-शिक्षण के बाद पंकज कुमार त्रिपाठी ने संविधान निर्माण, संविधान सभा की बहसों, डा. भीमराव अंबेडकर के विचारों और संविधान संशोधनों से जुड़े विषयों पर अध्ययन तथा सार्वजनिक विमर्श शुरु किया। उनके अनुसार, उन्होंने इन विषयों से संबंधित लगभग 29 हजार पृष्ठों की सामग्री का अध्ययन किया और अपने यूट्यूब चैनल ‘The Logical Indian99’ पर वीडियो शृंखलाओं के माध्यम से विचार प्रस्तुत किए। ‘सच संविधान का’ पुस्तक के जरिए भी उन्होंने संविधान और उसके संशोधनों से जुड़े अपने अध्ययन तथा निष्कर्षों को सामने रखा है। यूजीसी से संबंधित प्रावधानों और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर भी वे अपनी राय रखते हैं। जनवरी 2026 में उन्होंने जन-जागरण के उद्देश्य से सामान्य जन चेतना मंच (एसजेसीएम) की स्थापना की तथा संविधानवादी समाज पार्टी (एसएसपी) के माध्यम से राजनीतिक विकल्प की दिशा में पहल की। इस प्रकार किसान परिवार से निकलकर विधि के अध्यापन, लेखन और संवैधानिक बहसों तक पहुंची उनकी यात्रा आज शिक्षा, सामाजिक जागरुकता और राजनीतिक सक्रियता के विभिन्न आयामों से जुड़ी है।






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