रुद्राम्बिका महायज्ञ व श्रीमद्भागवत कथा के लिए निकली भव्य कलश यात्रा
करहाँ (मऊ) : गाधिपुरी जनपद अंतर्गत दुल्लहपुर के जफरपुर जमसड़ा मोड़ स्थित शिव मंदिर पर आयोजित सप्तदिवसीय रुद्राम्बिका महायज्ञ व श्रीमद्भागवत कथा के लिए सोमवार को पूर्वाह्न भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यज्ञ स्थल से शुरू होकर इस कलश यात्रा ने प्राचीन परंपरानुसार मुख्य यजमान के पैतृक कूप पर वरुण पूजन उपरांत वापस आकर विश्राम लिया। अब यहां सात दिन तक नित्य सुबह से शाम तक पूजन, अर्चन, हवन, परायण और परिक्रमा होगी जबकि कथा सायंकाल 05:30 से रात्रि 09 बजे तक सुनी जा सकेगी।
बता दें कि यह कथा और महायज्ञ श्रीमदआद्य जगद्गुरू शंकराचार्य वैदिक शोध संस्थानम काशी, श्रीपीठ गोवर्धन, श्रीकृष्ण योगमाया शक्तिपीठ अष्टभुजा व श्रीगोकुलम धाम मोतिया झील विंध्याचल के संस्थापक अध्यक्ष व भारत राष्ट्र के प्रख्यात शांकर सन्यासी परिव्राजकाचार्य परमहंस श्रीस्वामी ज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज के पावन सानिध्य में हो रही है। श्रद्धालुगण आपके ही श्रीमुख से कथा भी श्रवण करेंगे।
बता दें कि 108 पीत वस्त्र धारण की हुई कन्याएं माथे पर कलश धारण करके यज्ञ स्थल से वरुण पूजन हेतु गई। वैदिक ब्राह्मण आचार्य धंनजय पांडेय, महेशचन्द्र मिश्र, अभिषेक तिवारी, गौरव मिश्रा, शुभम तिवारी, विनीत पांडेय, प्रियव्रत शुक्ल, आशीष तिवारी, आयुष मिश्र आदि के मार्गनिर्देशन में यज्ञ के मुख्य यजमान रामविजय सिंह व डॉक्टर रामशब्द सिंह ने सपत्निक विधिविधान पूर्वक वरुण पूजन कार्य सम्पन्न कराया। यजमान द्वय कुटुम्ब और ग्रामवासियों समेत श्रीमद्भागवत ग्रंथ व मुख्य कलश माथे पर लेकर चल रहे थे। 108 कन्याओं से सुसज्जित इस कलश यात्रा में श्रद्धालु भक्त जयकारे लगाते हुए झंडे-पताके, हाथी-घोड़े, गाजे-बाजे व घरी-घंटा के साथ चल रहे थे।
मुख्य यजमान सेवानिवृत्त होमियोपैथ चिकित्साधिकारी डॉक्टर रामशब्द सिंह ने बताया कि मऊ जिले के नगपुर गांव में जन्म लेकर आज अपने ज्ञान के आलोक से सम्पूर्ण विश्व को देदीप्यमान करने वाले प्रख्यात शांकर सन्यासी स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज के पावन सानिध्य व मुखारबिंद से कथा श्रवण कराई जायेगी।
कलश यात्रा में मुख्य रूप से डॉक्टर अजय सिंह, डॉक्टर प्रमोद सिंह, रामेश्वर, ओंमकारेश्वर, सर्वेश्वर सिंह, तारा सिंह, उर्मिला सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामव्रज यादव, ग्राम प्रधान सिहागढ़ यादव सहित आसपास के गाँवों से सैकड़ों स्त्री-पुरुष, बालक-बालिकाएं मौजूद रहे।
सत्य सनातन परंपरा
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