शतचंडी महायज्ञ के कथा पंडाल में गूंजा श्रीराम-सीता विवाह का प्रसंग
करहां, मऊ। तिलसवां स्थित दुर्गा मंदिर पर चल रहे शतचंडी यज्ञ के चौथे दिन बुधवार को श्रीराम कथा में कौशिक महाराज ने श्रीराम-सीता विवाह का अनुपम और भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। उनके ओजस्वी शब्दों में मिथिला का स्वयंवर सजीव हो उठा।
उन्होंने बताया कि राजा जनक की सभा में शिव धनुष को उठाने में जब समस्त वीर असफल रहे, तब गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम ने सहज भाव से धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह गर्जना के साथ टूट गया। सभा जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठी और सीता जी ने श्रद्धा सहित प्रभु के गले में जयमाला डाल दी। देवों ने पुष्पवर्षा की, जनकपुर आनंद में डूब गया।
परशुराम संवाद के उपरांत अयोध्या से आई बारात के बीच वेद मंत्रों और मंगल गीतों संग विवाह संपन्न हुआ। महाराज ने कहा- यह विवाह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि मर्यादा, प्रेम और आदर्श जीवन का शाश्वत संदेश है। कथा से पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस में सराबोर रहा।

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