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हार्ट अटैक से बुझ गया देश का एक दीप, तिरंगे में लिपटा सूबेदार प्रेम शंकर का पार्थिव शरीर पहुंचा गांव, गाजीपुर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

हार्ट अटैक से बुझ गया देश का एक दीप, तिरंगे में लिपटा सूबेदार प्रेम शंकर का पार्थिव शरीर पहुंचा गांव, गाजीपुर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

करहां (मऊ) : मिट्टी की खुशबू लिए एक और वीर सपूत अमरत्व को प्राप्त हो गया। करहां परिक्षेत्र के सुहवल गांव निवासी भारतीय सेना के सूबेदार प्रेम शंकर चतुर्वेदी ने ड्यूटी के दौरान हृदयाघात से वीरगति पाई। वर्तमान में सिकंदराबाद में तैनात सूबेदार प्रेम शंकर चार फरवरी को सेवा पथ पर ही अचानक अस्वस्थ हो गए, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

गुरुवार देर रात जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो पूरा सुहवल गमगीन हो उठा। हर आंख नम थी, हर दिल बोझिल। वीर बेटे की अंतिम झलक पाने को गांव ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों से भी जनसैलाब उमड़ पड़ा। शुक्रवार सुबह उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। सेना के जवानों ने शस्त्र उलटकर सलामी दी, और गूंज उठे,- “जब तक सूरज-चांद रहेगा, प्रेम शंकर तेरा नाम रहेगा।” "भारत माता की जय।" "वंदेमातरम।" "इंकलाब जिंदाबाद।"

घर का आंगन सूना था, और पत्नी मिथिला देवी का करुण क्रंदन पत्थर दिलों को भी पिघला रहा था। तीन पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए प्रेम शंकर की आंखों में देश के लिए सपने थे। इत्तेफाक देखिए, कुछ ही दिन पहले उनका एक बेटा एयरफोर्स में भर्ती होकर उसी राह पर चल पड़ा, जिस पर पिता ने जीवन न्योछावर कर दिया।

वीर सपूत का अंतिम संस्कार गाजीपुर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान पूर्व मंत्री यशवंत सिंह, मुबारकपुर विधायक अखिलेश यादव, पूर्व एमएलसी रामजतन राजभर, पूर्व महाप्रधान चंद्रशेखर यादव, स्थानीय जनप्रतिनिधि रामबख्श सिंह, मयंक सिंह पल्लू, जमालुद्दीन अहमद समेत अनेक जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सेना के वरिष्ठ अफसरों एवं घर परिवार तथा क्षेत्रीय लोंगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। चार भाइयों में दूसरे नंबर पर रहे प्रेम शंकर आज पूरे इलाके के गर्व बन गए।

गांव-गांव शोक की लहर है, पर साथ ही सीना गर्व से चौड़ा भी। नम आंखों से लोगों ने वीर को अंतिम विदाई दी और कहा- “वो चला गया सरहदों के उस पार, मगर दिलों में अमर हो गया, देश की खातिर जो मिट जाए, वही सच्चा सिपाही कहलाया।” सुहवल की माटी ने आज अपने लाल को खोया है, मगर भारत मां ने एक और अमर सपूत पा लिया।



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