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पिता के संस्कार, शिक्षा और प्रेरणा से बनीं सफल चिकित्सक

पिता के संस्कार, शिक्षा और प्रेरणा से बनीं सफल चिकित्सक

करहां (मऊ) : पिता केवल परिवार के मुखिया नहीं होते, बल्कि वे अपने बच्चों के सपनों को दिशा देने वाले प्रथम मार्गदर्शक भी होते हैं। परदहा ब्लॉक अंतर्गत रेकवारेडीह गांव के सम्मानित परिवार में जन्मे यशवंत सिंह ने अपने जीवन में शिक्षा, सरलता, अनुशासन और कठिन परिश्रम को सर्वोच्च स्थान दिया। इन्हीं मूल्यों के बल पर उन्होंने शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया और हजारों विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा प्रदान की।

अर्थशास्त्र प्रवक्ता के रुप में बालक-बालिका इंटर कॉलेज, काझा में लंबे समय तक शिक्षण कार्य करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों में ज्ञान, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का संचार किया। अपने सेवाकाल के अंतिम दो वर्षों में प्रधानाचार्य के रुप में भी उन्होंने संस्थान के विकास और शैक्षिक गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

उनकी पुत्री डॉ. प्रमोदिता सिंह विभा बताती हैं कि उनके पिता ने हमेशा उनकी और उनके भाइयों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कभी भी अपने बच्चों पर अपनी इच्छाएं नहीं थोपीं, बल्कि उन्हें अपनी रुचि के अनुसार कैरियर चुनने की स्वतंत्रता दी। बचपन से ही चिकित्सक बनने का सपना देखने वाली प्रमोदिता को जब एक बार सफलता नहीं मिली, तब पिता ने निराश होने के बजाय दोबारा बेहतर प्रयास करने की प्रेरणा दी।

आज उसी प्रेरणा, मार्गदर्शन और आशीर्वाद का परिणाम है कि डॉ. प्रमोदिता सिंह विभा एमबीबीएस एवं एमएस की शिक्षा प्राप्त करने के बाद मऊ शहर स्थित अपने साईं हॉस्पिटल में महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ तथा सर्जन के रुप में सेवाएं दे रही हैं।

फादर्स डे के अवसर पर डॉ. प्रमोदिता सिंह विभा अपने पिता को नमन करते हुए कहती हैं कि उनकी हर उपलब्धि के पीछे पिता का त्याग, विश्वास और प्रेरणा है। वास्तव में, एक पिता का स्नेह और मार्गदर्शन ही वह मजबूत नींव है, जिस पर बच्चों के सपनों का भव्य भवन खड़ा होता है। यशवंत सिंह का जीवन और उनके संस्कार इस बात का सशक्त उदाहरण हैं कि एक समर्पित पिता न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे समाज के भविष्य का निर्माण करता है।



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