पति के असमय निधन के बाद बीमारी, कर्ज और जिम्मेदारियों से जूझ रही मीरा की जिंदगी
करहां (मऊ) : विश्व विधवा दिवस पर मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के सिकंदरपुर गांव की मीरा सिंह की कहानी उन हजारों महिलाओं के संघर्ष की मिसाल है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी परिवार को संभालने का साहस नहीं छोड़तीं। पति के असमय निधन, गंभीर बीमारियों, आर्थिक तंगी और दो बच्चों की जिम्मेदारी के बीच मीरा सिंह आज भी जीवन की कठिन राह पर डटी हुई हैं।
मुहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र के सिकंदरपुर गांव निवासी शिक्षक अजय कुमार सिंह ‘गुड्डू’ का 10 मार्च 2022 की सुबह निधन हो गया था। उनके निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। स्वयं मीरा सिंह लीवर सिरोसिस, एनीमिया, पित्त की थैली में पथरी, बढ़ी हुई तिल्ली, आंतों की नसों के फटने, खून व प्लेटलेट्स की कमी जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रही हैं। इसके बावजूद वह अपने एक दिव्यांग सहित दो बेटों का पालन-पोषण कर रही हैं।
मीरा बताती हैं कि वर्ष 2002 में बड़े सपनों के साथ उनकी शादी मेधावी छात्र अजय कुमार सिंह से हुई थी, जिन्होंने पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी। लेकिन कुछ ही वर्षों बाद परिवार को गंभीर बीमारियों ने घेर लिया। इलाज में लाखों रुपये खर्च हुए, जिससे परिवार कर्ज के बोझ तले दबता चला गया। दवाओं और इलाज के लिए अजय सिंह ने बैंक व परिचितों से ऋण लिया तथा खेती का बड़ा हिस्सा भी रेहन रखना पड़ा।
परिवार की परेशानियां तब और बढ़ गईं जब बड़े बेटे का जन्म कटे होंठ और तालू की समस्या के साथ हुआ। उसकी 03 माह से 12 वर्षो की उम्र तक 13 सर्जरी करानी पड़ी लेकिन फिर भी पूर्णतया ठीक नहीं हुआ। लगातार बढ़ते कर्ज और पारिवारिक जिम्मेदारियों के दबाव ने अजय सिंह को अवसाद की ओर धकेल दिया और अंततः उनका असामयिक निधन हो गया।
आज बीमारी और अभावों से घिरी मीरा सिंह छोटी-सी खेती के सहारे जीवन चला रही हैं। उनका कहना है कि वह हर कठिनाई सहकर अपने बच्चों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना चाहती हैं। उनका संघर्ष इस बात का जीवंत उदाहरण है कि विपरीत परिस्थितियों में भी एक मां अपने परिवार की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।



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