गढ़वा के पुरावशेषों की कहानी 1700 से 2000 साल पुरानी
कुषाणकालीन हैं गढ़वा कोट से मिले पुरातात्विक अवशेष
राज्य पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट से प्राचीन किले के इतिहास को मिली नई पहचान, संरक्षण की उम्मीद जगी
करहां (मऊ)। मुहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र के माहपुर ग्राम पंचायत के गढ़वा मौजा स्थित प्राचीन गढ़वा किले का इतिहास अब करीब 1700 से 2000 वर्ष पुराने कुषाणकाल से जुड़ता नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग के निरीक्षण में यहां से प्राप्त पात्रावशेषों को कुषाणकाल से संबंधित पाया गया है। विभाग की इस रिपोर्ट के बाद गढ़वा किले के पुरातात्विक महत्व को लेकर क्षेत्र में नई चर्चा शुरु हो गई है।
निरीक्षण में कुषाणकालीन मिले पात्रावशेष
उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग की निदेशक रेनू द्विवेदी ने डॉ. पंचम राजभर को भेजे पत्र में बताया है कि स्थल का निरीक्षण क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी एवं क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई वाराणसी द्वारा किया गया। निरीक्षण के दौरान पुरास्थल से प्राप्त पात्रावशेषों को कुषाणकाल से संबंधित पाया गया। कुषाणकाल लगभग ईसा पूर्व पहली शताब्दी से ईस्वी तीसरी शताब्दी तक माना जाता है। इस लिहाज से गढ़वा के ये पुरावशेष आज से लगभग 1700 से 2000 वर्ष पुराने अतीत की गवाही देते हैं।
एएसआई से संरक्षित है पुरास्थल
सीमांकन और बैरिकेडिंग की उठी मांग
डॉ. पंचम राजभर ने गढ़वा किले का सीमांकन कराने, अतिक्रमण से मुक्त कराने तथा सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग कराने की मांग की है। इसके अलावा स्थल पर विभागीय सूचना बोर्ड, शिलालेख और शिलापट्ट लगाने के साथ ही इसके सुंदरीकरण और विकास की भी अपील की गई है।
वैज्ञानिक अध्ययन से खुल सकते हैं इतिहास के कई राज
कुषाणकालीन पात्रावशेषों की पुष्टि के बाद गढ़वा किले का इतिहास और भी महत्वपूर्ण हो गया है। इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोगों का मानना है कि यदि यहां वैज्ञानिक ढंग से विस्तृत सर्वेक्षण और पुरातात्विक अध्ययन कराया जाए तो पूर्वांचल के प्राचीन इतिहास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। मिट्टी की परतों में दबे अवशेष उस दौर की सभ्यता और सांस्कृतिक गतिविधियों की मौन गवाही दे रहे हैं।
ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर सक्रिय हैं डॉ. पंचम राजभर
राज्य पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के बाद अब क्षेत्रवासियों की निगाहें सरकार और संबंधित विभाग की अगली पहल पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि गढ़वा किले का समुचित संरक्षण और विकास कर इसे पूर्वांचल की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर के रूप में पहचान दिलाई जाएगी।













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