ग्रामीण परिवेश से निकलकर शिक्षा की अलख जगा रहीं रुचि सिंह

ग्रामीण परिवेश से निकलकर शिक्षा की अलख जगा रहीं रुचि सिंह

करहां (मऊ) : ग्रामीण परिवेश से निकलकर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाली रुचि सिंह आज अनेक युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। ग्राम सलेमपुर, पोस्ट देवलास निवासी रुचि सिंह ने मर्यादा पुरुषोत्तम पीजी कालेज, रतनपुरा से शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने एमए, एमएड और नेट समाजशास्त्र की शिक्षा हासिल की है। वर्तमान में वह राजा हरिश्चंद्र महाविद्यालय, देवलास, मऊ की प्राचार्या के रुप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

वर्ष 2016 से महाविद्यालय के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रुचि सिंह महाविद्यालय की पूरी व्यवस्था को कुशलता से संभालने के साथ ही विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में जुटी हैं। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य है। उनके प्रयासों से अब तक महाविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर सैकड़ों युवा पुलिस, सेना और शिक्षक के रुप में सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा अनेक विद्यार्थी निजी क्षेत्र में भी रोजगार हासिल कर अपने परिवार का सहारा बन चुके हैं। रुचि सिंह का मानना है कि शिक्षा ही ग्रामीण समाज के विकास का सबसे मजबूत माध्यम है।

वह विद्यार्थियों को केवल डिग्री हासिल करने के बजाय आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। महाविद्यालय के माध्यम से वह ग्रामीण युवाओं को बेहतर शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही हैं। अपने कार्य के साथ-साथ वह दो बच्चों की परवरिश और पूरे परिवार की जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभा रही हैं। परिवार को साथ लेकर चलने के साथ ही उन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में भी सफलता की मिसाल कायम की है। उनके प्रयासों से महाविद्यालय से जुड़े करीब दो दर्जन लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

रुचि सिंह की कार्यशैली में अनुशासन, जिम्मेदारी और सेवा भावना का समन्वय दिखाई देता है। वह मानती हैं कि किसी भी शिक्षण संस्थान की सफलता उसके विद्यार्थियों की उपलब्धियों से तय होती है। इसी सोच के साथ वह लगातार विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने वाली रुचि सिंह आज महिला सशक्तीकरण की भी मिसाल बन चुकी हैं। उनका संघर्ष और सफलता यह संदेश देता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से ग्रामीण परिवेश से निकलकर भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।



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