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मोबाइल नहीं, हमारा उद्देश्य तय करे डिजिटल समय : एम.के. पांडेय

मोबाइल नहीं, हमारा उद्देश्य तय करे डिजिटल समय : एम.के. पांडेय

करहां (मऊ) : डिजिटल युग ने बच्चों और किशोरों के सामने सीखने की नई दुनियां खोल दी है। आज मोबाइल के माध्यम से विद्यार्थी कुछ ही क्षणों में देश-दुनियां की जानकारी हासिल कर सकते हैं, शैक्षिक वीडियो देख सकते हैं और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान खोज सकते हैं। समस्या तकनीक में नहीं, बल्कि उसके अनियंत्रित इस्तेमाल में है। कई बार किसी छोटे से काम के लिए खोला गया मोबाइल ध्यान को एक सामग्री से दूसरी सामग्री की ओर ले जाता है और विद्यार्थी अपने मूल उद्देश्य से दूर होता चला जाता है।

इससे बचने के लिए बच्चों में डिजिटल अनुशासन विकसित करना आवश्यक है। मोबाइल खोलने से पहले यह तय करना चाहिए कि उसका उद्देश्य क्या है और काम पूरा होने के बाद उसे बंद कर देना चाहिए। पढ़ाई के दौरान अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद रखना, सोशल मीडिया तथा मनोरंजन संबंधी सामग्री से दूरी बनाए रखना और स्क्रीन टाइम के लिए समय-सीमा तय करना उपयोगी कदम हैं। विद्यार्थियों को यह भी समझना चाहिए कि इंटरनेट पर दिखाई देने वाली हर चीज विश्वसनीय या उनके लिए आवश्यक नहीं होती; इसलिए किसी भी सामग्री को देखने से पहले उसकी उपयोगिता और स्रोत पर विचार करना जरुरी है।

विद्यालय बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान देने का स्थान नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने का भी माध्यम है। इसलिए शिक्षकों को डिजिटल संसाधनों के सकारात्मक उपयोग के साथ उसके संभावित दुष्प्रभावों के बारे में भी विद्यार्थियों को जागरुक करना चाहिए। अभिभावकों को भी बच्चों के साथ बैठकर उनकी आनलाइन गतिविधियों पर सहज संवाद करना चाहिए, ताकि नियंत्रण के बजाय समझ और आत्मअनुशासन विकसित हो। यदि विद्यार्थी अपने लक्ष्य को सामने रखकर डिजिटल साधनों का इस्तेमाल करना सीख लें, तो यही तकनीक समय की बर्बादी का कारण बनने के बजाय ज्ञान, रचनात्मकता और सफलता का मजबूत साधन बन सकती है।

-मनोज कुमार पांडेय, प्रधानाध्यापक

जे.के. मेमोरियल पब्लिक स्कूल, दरौरा, करहां, मऊ




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