मोबाइल से दूरी, अपनों की मौजूदगी को दें प्राथमिकता : अरविंद शर्मा
एम. शमीम मेमोरियल पब्लिक स्कूल, माहपुर, करहां में संस्कारशाला का वाचन
करहां (मऊ) : एम. शमीम मेमोरियल पब्लिक स्कूल माहपुर, करहां में शुक्रवार को दैनिक जागरण की संस्कारशाला के तहत ‘उपस्थिति की आवश्यकता’ विषयक लेख का वाचन किया गया। विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक अरविंद शर्मा ने छात्र-छात्राओं को संस्कारशाला के लेख के माध्यम से डिजिटल व्यवहार के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों से अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि आज मोबाइल फोन जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है, लेकिन इसके अत्यधिक इस्तेमाल से परिवार और समाज के बीच संवाद प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि सामने बैठे व्यक्ति से बातचीत के दौरान बार-बार मोबाइल देखना उसकी भावनाओं और बातों के प्रति असम्मान का संकेत बन सकता है। अरविंद शर्मा ने विद्यार्थियों से कहा कि जब कोई व्यक्ति हमसे बात करे तो मोबाइल छोड़कर उसकी बात ध्यानपूर्वक सुननी चाहिए।
उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान मोबाइल में व्यस्त रहने से संवाद की गुणवत्ता कम होती है और आपसी समझ तथा विश्वास भी प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि परिवार में एक साथ बैठकर समय बिताना केवल साथ रहने तक सीमित नहीं होना चाहिए। एक-दूसरे की बात सुनना, भावनाओं को समझना और संवाद करना भी पारिवारिक रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए जरुरी है।
उन्होंने बच्चों को मोबाइल का उपयोग आवश्यकता और उपयोगिता के अनुसार करने की सलाह दी। वरिष्ठ अध्यापक ने कहा कि डिजिटल माध्यम हमारे जीवन को सुविधाजनक बनाने के लिए हैं, न कि हमारे रिश्तों के बीच दूरी बढ़ाने के लिए।वउन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि भोजन, पढ़ाई, पारिवारिक बातचीत और महत्वपूर्ण अवसरों पर मोबाइल से दूरी बनाना अच्छी आदत है। उन्होंने बताया कि सामने वाले व्यक्ति की ओर देखकर बातचीत करने से अपनापन और विश्वास बढ़ता है।
मोबाइल पर लगातार ध्यान केंद्रित करने से व्यक्ति आसपास मौजूद लोगों की भावनाओं और जरुरतों को नजरअंदाज कर सकता है। इससे छोटी-छोटी बातों पर नाराजगी और परिवार में तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि वास्तविक जीवन के रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत उपस्थिति बेहद जरूरी है। संस्कारशाला के लेख में भी परिवार के सदस्यों के बीच मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल से उत्पन्न हो रही दूरी पर चिंता व्यक्त की गई है।
लेख के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि अपनों के साथ बिताया गया समय मोबाइल की स्क्रीन से अधिक महत्वपूर्ण है। अरविंद शर्मा ने कहा कि बच्चों को स्वयं मोबाइल के उपयोग में संयम बरतने के साथ ही बड़ों से भी इसका संतुलित प्रयोग सीखना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने घर में मोबाइल उपयोग को लेकर सकारात्मक वातावरण बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल ज्ञान, शिक्षा और जरूरी संवाद के लिए किया जाए तो यह बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। वहीं, इसका अनावश्यक और लगातार इस्तेमाल व्यक्ति को सामाजिक रूप से अलग-थलग भी कर सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपने परिवार के सदस्यों के साथ नियमित रुप से बातचीत करने और उनके साथ समय बिताने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसी की मौजूदगी में केवल शरीर से उपस्थित होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मन से भी उसके साथ जुड़ना जरुरी है। संस्कारशाला के इस पाठ ने विद्यार्थियों को अपने डिजिटल व्यवहार पर विचार करने और उसमें आवश्यक सुधार करने का संदेश दिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने लेख के विषय को गंभीरता से समझा और मोबाइल के संतुलित उपयोग का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी विद्यार्थियों को डिजिटल अनुशासन के महत्व से परिचित कराया। इस अवसर पर आरिफ खां, दीपक सिंह, अब्दुल्ला खां, अनुराग यादव, आकिब शमीम खां, अनुभव सिंह, दानिश खां, साजिया खानम आदि शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।


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