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जैव उर्वरक का प्रयोग कर रासायनिक खादों से निजात पाएं किसान : डा. हिलोल चकदार

जैव उर्वरक का प्रयोग कर रासायनिक खादों से निजात पाएं किसान : डा. हिलोल चकदार

•चकजाफ़री में 'मेरा गांव मेरा गौरव' विषयक कृषक प्रशिक्षण संपन्न

•120 महिला-पुरुष किसानों को निश्शुल्क प्रदान किया गया जैव उर्वरक

करहां (मऊ) : मेरा गांव मेरा गौरव विषयक तीन दिवसीय कृषक प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन गुरुवार को करहां परिक्षेत्र के चकजाफ़री गांव स्थित सामुदायिक मिलन केंद्र पर एक किसान शिविर का आयोजन किया गया। इसमें उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों ने जैव उर्वरक के लाभ एवं प्रयोग के तरीकों के बारे में बताया। साथ ही 120 महिला-पुरुष किसानों को निश्शुल्क बायो उर्वरक प्रदान किया गया।

एनबीएआईएम व आईसीएआर कुशमौर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. कुमार एम. ने कहा कि भारत के किसान जैव उर्वरक का प्रयोग कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति को संरक्षित व संवर्धित कर सकते हैं। आने वाले समय में इसका प्रयोग हर दृष्टि से उपयोगी है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डाक्टर हिलोल चकदार ने कहा कि किसान जैव उर्वरक को अपनाकर धीरे-धीरे रासायनिक खादों पर से अपनी निर्भरता कम करें। इससे फसल व मिट्टी दोनो की उत्पादकता में कमाल की वृद्धि होती है और लोगों का स्वास्थ्य भी उत्तम बना रहता है।

युवा व्यावसायिक मनीष वर्मा ने उपस्थित किसानों को बताया कि धान की नर्सरी डालने से पहले 100 एमएल जैव उर्वरक एक एकड़ अर्थात 6 किलोग्राम बीज के शोधन के लिए पर्याप्त है। जिसे 900 एमएल पानी में मिलाकर कुल एक लीटर बनाकर बीज का शोधन करना है। पुनः धान की रोपाई करते समय नर्सरी की जड़ो को 500 एमएल जैव उर्वरक में 2.5 लीटर पानी मिलाकर 10-10 मिनट के लिए जड़ को डुबाकर रोपाई करनी है। इससे उत्पादन अच्छा होगा, रोग नहीं लगेगा और रासायनिक खादों की जरुरत ना के बराबर होगी।

वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने कुल 120 महिला-पुरुष किसानों को अपने हाथ से 100-100 एमएल का संस्थान में निर्मित बायोग्रो नामक जैव उर्वरक प्रदान किया। स्वागत व संचालन दपेहड़ी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के डायरेक्टर चंद्रपाल चौहान ने किया तो धन्यवाद ज्ञापन चंदन राव ने किया। इस अवसर पर संजय कुमार, संगीता, दूधनाथ, सुशीला, सुरेश कुमार, आशा, ऋषि कपूर, पूनम, महेशचंद्र, रेखा देवी आदि किसान उपस्थित रहे।



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