दवा बिक्री पर लगातार बढ़ते प्रतिबंधों से विक्रेता नाराज, नीतियों की समीक्षा की मांग
करहां (मऊ) : स्थानीय बाजार स्थित शिव मंदिर परिसर में रविवार को औषधि विक्रेता जन कल्याण सेवा समिति की बैठक हुई। अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष विष्णुकांत श्रीवास्तव ने की। बैठक में दवाओं की बिक्री को लेकर लगातार लागू किए जा रहे नए नियमों और प्रतिबंधों पर दवा विक्रेताओं ने चिंता जताई।
समिति के अध्यक्ष ने कहा कि बी.फार्मा, डी.फार्मा और एम.फार्मा जैसी निर्धारित योग्यताएं पूरी करने के बाद सरकार मेडिकल स्टोर का लाइसेंस देती है, लेकिन इसके बाद दवा विक्रेताओं पर लगातार नए नियम लागू किए जा रहे हैं। शेड्यूल-एच1 की दवाओं के लिए स्टाक रजिस्टर सहित कई प्रावधान लागू किए गए। इसके बाद अनेक दवाओं को एनआरएक्स श्रेणी में शामिल कर उनकी बिक्री को भी कठिन बना दिया गया। अब कफ सिरप समेत अन्य दवाओं पर भी प्रतिबंध लगाने की चर्चाओं से विक्रेताओं में असंतोष है।
उन्होंने कहा कि सरकार को दवा विक्रेताओं और मरीजों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नियम बनाने चाहिए। उनका आरोप था कि बड़े नर्सिंग होम और निजी अस्पतालों में संचालित मेडिकल स्टोरों के लिए भी वही नियम लागू होने चाहिए, जो लाइसेंसधारी दवा विक्रेताओं पर लागू होते हैं। आनलाइन माध्यमों और अवैध नेटवर्क से प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के बजाय केवल लाइसेंसधारी दुकानदारों पर नए प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है।
बैठक में दवा विक्रेताओं ने सरकार से दवा बिक्री से संबंधित नीतियों की व्यापक समीक्षा करने और नए नियम लागू करने से पहले संबंधित लोगों से विचार-विमर्श करने की मांग की। इस अवसर पर महामंत्री विजय सिंह, सोहन राजभर, राम प्रवेश चौहान, श्यामलाल, जगधारी, कर्मचारी अभिषेक सहित बड़ी संख्या में औषधि विक्रेता मौजूद थे।

Post a Comment