रामराज्य बैठे त्रैलोका, हर्षित भए गए सब शोका
मुहम्मदाबाद गोहना व सौसरवां में श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ रामलीला संपन्न
मालव में मेघनाद, कुंभकर्ण और रावण वध की लीला का हुआ मंचन
मुहम्मदाबाद गोहना स्थित श्रीदशहरा रामलीला धर्मार्थ ट्रस्ट के मंच पर भरत मिलाप का दृश्य देखते ही दर्शक भावुक हो उठे। प्रभु श्रीराम के अयोध्या आगमन का समाचार पाकर भरत की व्याकुलता और दोनों भाइयों के मिलन की घड़ी ने प्रेम, त्याग और समर्पण की ऐसी छटा बिखेरी कि अनेक आंखें नम हो गईं। चौदह वर्षों तक बड़े भाई की खड़ाऊं को सिंहासन पर रखकर राजधर्म निभाने वाले भरत और वनवास की कठिनाइयां सहकर लौटे श्रीराम का मिलन रामकथा के आदर्शों को जीवंत कर गया। इसके बाद गुरु वशिष्ठ के सानिध्य में भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ। अखाड़ों के कलाकारों ने विविध रोमांचक करतबों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
उधर आदर्श रामलीला समिति सौसरवां-कमालुद्दीनपुर के आकर्षक मंच पर भी रामराज्य की स्थापना का प्रसंग श्रद्धा और उल्लास के बीच प्रस्तुत किया गया। श्रीराम के राजतिलक के साथ ही मानो त्याग, मर्यादा, न्याय और लोककल्याण पर आधारित आदर्श शासन की परिकल्पना साकार हो उठी। इसके पश्चात ‘परिवार’ नामक सामाजिक नाटक का मंचन कर पारिवारिक एकता, आपसी प्रेम और संस्कारों का संदेश दिया गया। रामराज्य की मंगलकामना के साथ रामलीला का विराम हुआ। वहीं, मालव के रामलीला मंच पर मेघनाद, कुंभकर्ण और रावण वध की लीलाओं ने दर्शकों में उत्साह भर दिया।
कार्यक्रमों में रामलीला समिति के अध्यक्ष छोटू प्रसाद, बृजबिहारी सिंह व ओमप्रकाश सिंह, महामंत्री अशोक पांडेय, रामसरन चौहान व सत्यप्रकाश सिंह रिंटू, विनोद सिंह, श्रीधर पांडेय, राजेश चौहान, संजय तिवारी, आशुतोष पांडेय, राजीव सेठ, रामनयन चौबे, लालचंद प्रजापति, नागेंद्र सिंह, अनीश सिंह, भूपेंद्र पांडेय, महावीर प्रसाद, विजय प्रताप, ठाकुर प्रसाद सिंह, रामअवध, जनार्दन शर्मा, विपिन चौबे सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।



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