चकजाफरी में जागी हरित आशा, जैव उर्वरक से सजेगी खेती की नई राह
करहां, मऊ। धरती की खुशबू और किसानों के सपनों के बीच गुरुवार का दिन चकजाफरी गांव के लिए खास बन गया। सामुदायिक मिलन केंद्र में ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ अभियान के तहत चल रहे तीन दिवसीय कृषक प्रशिक्षण के दूसरे दिन जब जागरूकता शिविर सजा, तो मानो खेती की नई उम्मीदों का द्वार खुल गया।
खेत-खलिहानों से जुड़े किसान जब एक छत के नीचे एकत्र हुए, तो कृषि वैज्ञानिकों के शब्द उनके लिए मार्गदर्शन बनकर गूंजे। जैव उर्वरक की चर्चा केवल तकनीक नहीं रही, बल्कि वह मिट्टी की सेहत, फसल की समृद्धि और इंसान की भलाई का संदेश बन गई। इसी क्रम में 120 महिला और पुरुष किसानों को निःशुल्क जैव उर्वरक प्रदान किया गया, जैसे किसी नई शुरुआत का प्रतीक।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कुमार एम. ने सहज शब्दों में समझाया कि यदि किसान प्रकृति के साथ कदम मिलाकर चलें, तो मिट्टी की उर्वरा शक्ति सहेजी जा सकती है और उसकी गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। वहीं डॉ. हिलोल चकदार ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने की सलाह देते हुए कहा कि जैव उर्वरक केवल फसल ही नहीं, बल्कि जीवन को भी स्वस्थ बनाते हैं।
युवा व्यावसायिक मनीष वर्मा ने जब धान की खेती में जैव उर्वरक के प्रयोग की विधि बताई, तो किसानों की आंखों में एक नई समझ और उत्साह झलकने लगा। बीज उपचार से लेकर रोपाई तक की हर प्रक्रिया को उन्होंने ऐसे समझाया, जैसे कोई अनुभवी किसान अपने अनुभव की कहानी सुना रहा हो।
कार्यक्रम के अंत में ‘बायोग्रो’ जैव उर्वरक का वितरण हुआ, जो केवल एक सामग्री नहीं, बल्कि एक संदेश था प्राकृतिक खेती की ओर लौटने का। संचालन की गरिमा चंद्रपाल चौहान ने संभाली, जबकि चंदन राव ने आभार के शब्दों से इस आयोजन को पूर्णता दी। संजय कुमार, संगीता, दूधनाथ, सुशीला, सुरेश कुमार, आशा, ऋषि कपूर, पूनम, महेशचंद्र, रेखा देवी सहित अनेक किसानों की उपस्थिति ने इस शिविर को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामूहिक जागरूकता का उत्सव बना दिया।


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